चुनाव आएगा तो हम एक दूसरे की बखिया उधेड़ेंगे, काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखेंगे, छिपाए न छिपने वाला भ्रष्टाचार या कोई अन्य संगीन आपराधिक आरोप हुआ तो जेल भेजने का वादा भी कर लेंगे। लेकिन जब सत्ता में आएंगे तो भूल जाएंगे।ये भारतीय राजनीति का सबसे विश्वसनीय अलिखित घोषणापत्र है जिस पर सभी दलों के प्रमुख नेताओं के अदृश्य हस्ताक्षर हैं।
हर चुनाव में यह घोषणापत्र चमकता है फिर लुप्त हो जाता है और वोटर भी भूल जाता लगता है। नेताओं के बीच यह सहमति एक बड़े मकसद के लिए है जिसे देश के संसाधनों की लूट और तत्पश्चात एक दूसरे को बचाने की कला कहा जाना चाहिए। चुनावी सीजन में भ्रष्टाचार का अंत करके एक दूसरे को जेल भेजने के वादे लाउडस्पीकरों से इन दिनों फिजां में गूंज रहे हैं, ऐसे में पुराने वादों का याद आना स्वाभाविक है।
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मोदी के आरोप
पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के वंशवाद और भ्रष्टाचार को चुटकी में पकड़ने के लिए दो विशेषणों 'शहजादे' और 'दामाद जी' का आविष्कार किया था। 'शहजादे' का इस्तेमाल देश में लोकतंत्र का होना बताने के लिए हुआ, लेकिन सोनिया गांधी के दामाद यानी रॉबर्ट वाड्रा को भूमि अधिग्रहण घोटालों में जेल भेजने का वादा भी भाजपा ने किया था। यही नहीं मोदी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक साल के भीतर मामलों का निपटारा करने वाली स्पेशल कोर्ट बनाकर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सभी नेताओं को जेल भेजने का वादा किया था, लेकिन अब सिर्फ यूपी के चुनाव में ही सबसे अधिक दागी उम्मीदवार भाजपा के टिकट पर लड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री पौने तीन साल से लगातार कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर बोले जा रहे हैं, लेकिन तब जो गुस्सा और आत्मविश्वास था अब मिमिक्री में बदल गया है। वे कह रहे हैं कि उनके पास कांग्रेस की जन्मकुंडली है, यह घुड़की सिर्फ अखिलेश यादव के साथ मिलकर नई चमक पा गए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को चुप कराने के लिए है। वरना राहुल गांधी के ललकारने पर कि वे इस कुंडली का जो चाहे कर सकते हैं, इतनी चुप्पी न होती।
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कांग्रेस का दोषारोपण
इसके पहले यूपीए-2 की सरकार में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी भाजपा के प्रति कम सदाशयता नहीं दिखाई थी। उन्होंने जब भी 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र आया 'मौत के सौदागर' और 'खून के दलाल' को पहचाना, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। उससे पहले कांग्रेस ने 1993 के मुंबई दंगों की जांच करने वाले श्रीकृष्ण आयोग की रपट पर जिसमें शिवसेना को साफ तौर पर दोषी पाया गया था, अमल का वादा किया था, लेकिन जब वक्त आया तो चुप लगा गई।
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यूपी का दंगल
देश के सबसे बड़े सबसे सूबे यूपी के चुनाव में मायावती समाजवादी पार्टी के गुंडो के जेल भेजने का वादा कर रही हैं। अखिलेश यादव के चेहरे पर लड़े गए पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने अंबेडकर स्मारक घोटाले की जांच कराकर मायावती को जेल भेजने का वादा किया था। भाजपा सपा राज में हुई भर्तियों की जांच कराकर सभी किस्मों के माफिया, भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने की हलफ उठा रही है।
पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने उन अफसरों को भी जेल भेजने का वादा किया था जिनके जरिए मायावती के राज में मुलायम सिंह और शिवपाल यादव को सरेआम अपमानित किया गया था। हुआ उल्टा इनमें से अधिकांश अफसर अखिलेश की सरकार में प्राइमपोस्टिंग पाते रहे। भ्रष्टाचार को भूल कर व्यावहारिक होते अखिलेश यादव ने अब अपनी मायावती बुआ को चिढ़ाना शुरू कर दिया है। अब उनका भाषण अंबेडकर पार्क में लगे पत्थर के हाथियों के कई साल से एक ही जगह खड़े होने पर बालसुलभ आश्चर्य जाहिर करके खत्म हो जाता है।
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दिल्ली में आप के तेवर
दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कॉमनवेल्थ घोटाले में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को जेल भेजने का वादा किया था। लेकिन इसी बीच मोदी जिस एनसीपी पर नेशनल करप्ट पार्टी होने का जुमला गढ़ा था उसके नेता शरद पवार को उनकी सरकार पद्मविभूषण दे चुकी है।
इस घोषणापत्र की उपधाराओं का फायदा पाते हुए उद्योगपति विजय माल्या और ललित मोदी अपने सुरक्षित ठिकानों में पहुंच चुके हैं।
यह सिलसिला उस क़ागज के टुकड़े से भी पुराना है जिसे पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह अस्सी के दशक में जनमोर्चा की सभाओं में जेब से निकाल कर दावा करते थे कि उस पर स्विस बैंक में चालू 'लोटस' नाम के व्यक्ति के खाते का नंबर लिखा हुआ है और उसे सत्ता मिलते ही जेल भेजा जाना है।
ऐसे हर वादे पर तालियां बजाने वाले वोटर को भी, नेता के सत्ता में आकर सबकुछ भूल जाने पर कभी दिक्कत नहीं होती। वह अगली बार ताली बजाने लायक नई उत्तेजना की प्रतीक्षा करने लगता है। यह भारतीय लोकतंत्र का विचित्र किंतु सत्य किस्म का चरित्र है। इसे बनाए रखने के लिए सभी दलों के नेताओं में एक और बात पर सहमति है कि वे चुनाव में जीते या हारें, हर मौके पर जनता को 'महान' कहना नहीं भूलेंगे।