समंदर का सिकंदर भारतीय नौसेना का ताकतवर विमान वाहक पोत आईएनएस विराट 6 मार्च को सेवानिवृत्त हो जाएगा। सोमवार को वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा ने यह जानकारी दी। आईएनएस विराट उन्नत किस्म का दूसरा विमानवाहक पोत है, जो समुद्र में अपनी धाक जमाने में सक्षम था। दुनिया का सबसे पुराना विमान वाहक पोत भारतीय नौसेना में 30 साल तक सेवा देने से पहले ब्रिटिश रायल नेवी में भी 27 साल तक अपनी सेवा दी थी।
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संग्रहालय में बदल जाएगा आईएनएस विराट
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पश्चिमी नौसेना कमांड के लेग ऑफिसर कमांडिंंग इन चीफ ने मुंबई में पत्रकारों को बताया कि आईएनएस विराट को सेवा से हटाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। उसे रिटायर करने से पहले 4, 5 और 6 मार्च को इस पोत पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें सेवा देने वाले नौसेना के अधिकारी भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इतने दिनों की सेवा के बाद भी विराट बढ़िया हालत में है।
हालांकि इससे हमारे पास दो विमान वाहक पोत कम हो जाएंगे, क्योंकि इससे पहले आईएनएस विक्रांत को सेवा से हटाया गया था। आईएनएस विराट को 12 मई 1987 को भारतीय नौसेना के बेडे़ में शामिल किया गया था। तब इसका घोष वाक्य था ‘जलमेव यस्य, बलमेव तस्य।’
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आईएनएस विराट संसद में आतंकी हमले के बाद 13 दिसंबर 2001 को ऑपरेशन पराक्रम और श्रीलंका में शांति स्थापित करने के लिए 27 जुलाई 1989 को चलाए गए ऑपरेशन ज्युपिटर में भी अपनी भूमिका निभा चुका है। वैसे सबसे ज्यादा समय तक सेवा में रहने की वजह से इसका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में पहले ही दर्ज हो चुका है।
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संग्रहालय में बदल जाएगा आईएनएस विराट
आईएनएस विराट का क्या होगा, इस बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा का कहना है कि आंध्र प्रदेश सरकार से इस बारे में बातचीत चल रही है। अगर आंध्र सरकार इसे म्यूजियम में बदलती है तो इस पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च आएगा। अब अंतिम फैसला आंध्र सरकार को करना है। दरअसल एक एयरक्राफ्ट कैरियर जितना महंगा होता है उसी के अनुरूप उसके रखरखाव में भी खर्च आता है। जब तक वह ऑपरेशनल होता है तब तक उसका खर्च नौसेना उठाती है, लेकिन उसके बाद खर्च वहन करना मुश्किल हो जाता है।
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विराट की विदाई में शरीक होंगे रॉयल नेवी के अधिकारी
6 मार्च को भारतीय नौसेना के बेड़े से आईएनएस विराट को हटाए जाने के दौरान ब्रिटिश रॉयल नेवी के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यह विमानवाहक युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल होने से पहले 27 साल रायल नेवी की सेवाएं दे चुका है। तब इसका नाम एचएमएस हार्मेस था।
विराट पर एक नजर
- 1959 में यह रॉयल नेवी में शामिल हुआ। भारतीय नौसेना में इसे 12 मई 1987 को शामिल किया गया।
- इस पोत में सी हैरियर लड़ाकू विमान तैनात थे, साथ में इस पर हेलीकॉप्टर भी मौजूद थे।
- वर्ष 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम में भी विराट की भूमिका थी।
- 743 फीट लंबा विराट की रफ्तार करीब 52 किलोमीटर प्रतिघंटा है।
- इस पोत में करीब 1500 नौसैनिक रहते थे और एक बार जब समंदर से निकलता था तो साथ में तीन महीने का राशन लेकर निकलता था।
- विराट के डेक से कई लड़ाकू विमानों ने 22,034 उड़ान भरी है।