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25 साल पहले यूं दहल उठी थी मायानगरी मुंबई

Mon, 12 Mar 2018 01:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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आज से ठीक 25 साल पहले 12 मार्च 1993 को मुंबई सीरियल ब्लास्ट से दहल उठी। 2 घंटे 10 मिनट तक 12 धमाके हुए। हमले में 257 लोगों की जान गई जबकि 700 से अधिक लोग जख्मी हुए। यह सबसे बड़ा आतंकी हमला था। देश में हमले में पहली बार आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले से जुड़े लोग आज भी वो भयानक मंजर नहीं भूले हैं। इसी हमले के बाद देश में गैंगस्टर, स्मगलर के खिलाफ अभियान तेज हुआ।
   
हमले के बाद 180 लोगों को पकड़ा गया और 129 को आरोपी बनाया गया। करीब 100 लोगों को दोषी करार दिया गया। इनमें से 12 को फांसी की सजा और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। आज भी हमले के आरोपियों को पकड़ने का सिलसिला जारी है। आपको इस हमले से जुड़ी कुछ बातें बताते हैं।
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हुए बड़े बदलाव

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मुंबई में हुए इस बड़े हमले में अंडरवर्ल्ड का हाथ था। इससे जुड़े लोग बॉलीवुड और बिल्डरों से वसूली करते थे। इनके खात्मे के लिए एक कानून बना जिसे 'मकोका कानून' कहा जाता है। जिसके बाद एनकाउंटर शुरू हुए और मुंबई से अंडरवर्ल्ड का खात्मा किया गया। 

 
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मुंबई धमाके पर लिखी गई किताब

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हुसैन जैदी ने साल 2000 में 'ब्लैक फ्राइडे' किताब लिखी। यह किताब मुंबई में हुए धमाकों पर आधारित थी। इसके बाद इसी किताब पर आधारित फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' फिल्म 2004 में बनी जो 9 फरवरी 2007 को भारत में रिलीज हुई। 

ये बने पहले जांच अधिकारी

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धमाके के बाद तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सुरेश वालीशेट्टी को धमाकों का जांच अधिकारी बनाया गया। तत्कालीन कमिश्नर का कहना है कि 30 अलग-अलग एंगलों से जांच की गई। लेकिन धमाकों के 25 साल बाद भी कुछ आरोपी भारत में ही रह रहे हैं। उन पर आरोप साबित करना एक चुनौती है। ठोस सबूत होने के बाद भी इकबाल कासगर आराम से घूम रहा है और दाऊद की संपत्ति का मालिक बना बैठा है। दाऊद को पकड़ पाना भी मुश्किल है क्योंकि अगर वह जांच एजेंसियों के हाथ लगता है, तो पाकिस्तान को अपनी साजिश दुनिया के सामने लाने का खतरा होगा। वह अपनी मर्जी से भारत भी नहीं लौटेगा। टाइगर को पहले इसलिए पकड़ा गया क्योंकि वही बम विस्फोट करने और दाऊद के बीच का जरिया था। 
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ये लड़े सबसे लंबा केस

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धमाके के दोषियों को वकील उज्जवल निकम ने सजा दिलवाई। उज्जवल निकम के अनुसार धमाके की साजिश दुबई में रची गई थी। यह बात आरोपियों के पासपोर्ट की जानकारी हासिल करने के दौरान सामने आई। पासपोर्ट से मुंबई और दुबई की उड़ान का पता चला। हमलावरों का चुनाव दुबई में हुआ जबकि ट्रेनिंग पाकिस्तान में दी गई। लेकिन पाक के खिलाफ ठोस सबूत ना मिलने के कारण सीबीआई ने भारत के खिलाफ युद्ध की धाराएं हटा दीं।
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इन्होंने सुनाये बड़ा फैसला

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मुंबई में हुए बड़े हमले पर जज प्रमोद खेड़े ने फैसले लिए। प्रमोद खोड़े का कहना है कि उनके लिए सुनवाई का हर दिन एक नई चुनौती की तरह होता था। शुरूआत में 180 लोग पकड़े गए। उनकी जांच की गई पर सबूतों के अभाव में 30-40 लोगों को छोड़ दिया गया। आखिर में 129 लोगों को आरोपी बनाया गया। उन पर अलग-अलग मामलों में 700-750 धाराएं लगाई गईं। 14 हजार पेज के लिखित सबूत जुटाए गए जबकि 500 पेजों का ऑपरेटिव ऑर्डर था। साथ ही 15 हजार पेजों में जजमेंट ऑर्डर तैयार किया गया। 
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मुख्य आरोपी आज भी आजाद

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हमले के 25 साल बाद भी आरोपियों को पकड़ा जा रहा है, लेकिन मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम आज भी आजाद घूम रहा है। 1 अप्रैल 1994 को टाडा कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें 12 दोषियों को फांसी, 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। महज चार दिन पहले भी इस केस का एक और आरोपी फारूख टकला को दुबई से मुंबई लाया गया है। 
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