धमाके के बाद तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सुरेश वालीशेट्टी को धमाकों का जांच अधिकारी बनाया गया। तत्कालीन कमिश्नर का कहना है कि 30 अलग-अलग एंगलों से जांच की गई। लेकिन धमाकों के 25 साल बाद भी कुछ आरोपी भारत में ही रह रहे हैं। उन पर आरोप साबित करना एक चुनौती है। ठोस सबूत होने के बाद भी इकबाल कासगर आराम से घूम रहा है और दाऊद की संपत्ति का मालिक बना बैठा है। दाऊद को पकड़ पाना भी मुश्किल है क्योंकि अगर वह जांच एजेंसियों के हाथ लगता है, तो पाकिस्तान को अपनी साजिश दुनिया के सामने लाने का खतरा होगा। वह अपनी मर्जी से भारत भी नहीं लौटेगा। टाइगर को पहले इसलिए पकड़ा गया क्योंकि वही बम विस्फोट करने और दाऊद के बीच का जरिया था।