ठरू उल्देपुर निवासी खुशी (काली टी-शर्ट में) अपने पिता बलजीत खत्री, मां सुनीता व यूक्रेन से साथ लौटी गुरुग्राम निवासी अंकिता (लाल टी-शर्ट) के साथ।
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तन्नू उर्फ खुशी लौटी वतन, बेटी को देख छलके माता-पिता के आंसू
रोमानिया से विद्यार्थियों को लेकर एक फ्लाइट दोपहर 1.20 बजे दिल्ली पहुंची। वतन लौटने पर सभी विद्यार्थी बहुत खुश नजर आए। इन विद्यार्थियों में गन्नौर के ठरू उल्देपुर निवासी तन्नू उर्फ खुशी भी शामिल है। खुशी को लेने के लिए उसके पिता एडवोकेट बलजीत खत्री व मां सुनीता दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे। बेटी को सकुशल देख माता-पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। खुशी के चाचा कुलदीप खत्री ने बताया कि बेटी की वतन वापसी पर पूरा परिवार बहुत खुश है। बेटी पहले दिल्ली में रहने वाली अपनी बुआ के घर गई। वहां से शाम को गांव पहुंची है।
भारतीय दूतावास ने की पूरी मदद, अभी भी फंसे हजारों विद्यार्थी
घर लौटी खुशी ने बताया कि यूक्रेन में हालात बेहद खराब हैं। हजारों विद्यार्थी अभी भी वहीं फंसे हुए हैं, उनमें सोनीपत के भी कई विद्यार्थी हैं। खुशी ने बताया कि वह टर्नापिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस करने के लिए तीन महीने पहले ही यूक्रेन गई थी। हालात बिगड़ने पर 24 फरवरी की फ्लाइट बुक करवाई। 23 फरवरी की रात 12 बजे कीव के लिए निकले और सुबह 6 बजे पहुंचे। हवाई अड्डे पर पहुंचने से पहले ही दोस्तों ने हवाई अड्डे पर बम ब्लास्ट होने की सूचना दी। उसके बाद सभी फ्लाइट रद्द हो गई। ट्रेनें भी बंद कर दी गईं। भारतीय दूतावास ने हमारी मदद की और हमें नजदीक ही एक स्कूल में रखा। तीन दिन से हम उसी स्कूल में रुके हुए थे। जहां पीने के लिए पानी जरूर कम था, लेकिन भारतीय दूतावास हरसंभव मदद कर रहा था। 26 फरवरी को हमें ट्रेन द्वारा इवान लाया गया। यहां से टैक्सी लेकर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। जहां पहले से हजारों विद्यार्थी व नागरिक मौजूद थे। जिन यूनिवर्सिटी के डीन या एजेंसी वहां मौजूद थी, उन्हें ही बॉर्डर पार करने की इजाजत मिली। भारतीय दूतावास ने हर कदम पर साथ दिया। अगर भारत सरकार सहयोग नहीं करती तो वापस लौटना मुमकिन नहीं था।