साल 2016 में जाट आरक्षण हिंसा के दौरान रोहतक में हरियाणा के तत्कालीन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने 56 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। सीबीआई की पंचकूला अदालत में 60 लोगों के खिलाफ विस्तृत जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
जाट आरक्षण आंदोलन में 19 और 20 फरवरी 2016 को शहर में सबसे ज्यादा हिंसा हुई थी। दो दिनों तक शहर पूरी तरह बंधक था। उपद्रवियों ने दुकानें और आशियाने ही नहीं शहर का अमन, चैन भी जलाकर राख कर दिया था।
उपद्रवियों ने पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की सेक्टर-14 स्थित कोठी भी आग के हवाले कर दी थी। 10 साल तक चली मुकदमों की सुनवाई के बाद शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट ने अपने फैसले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अब सवाल उठता है कि अगर सभी आरोपी निर्दोष थे तो कैप्टन की कोठी में आग किसने लगाई थी?
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का दृश्य
- फोटो : फाइल फोटो
जाट आरक्षण हिंसा का जिक्र आते ही जलते रोहतक की तस्वीरें आंखों के सामने उभर आती हैं। आरक्षण की मांग को लेकर 10 साल पहले रोहतक से आंदोलन ने जोर पकड़ा था। सांपला में रैली के बाद आंदोलन तेजी से भड़का। 16 फरवरी तक शहर के चारों तरफ के रास्तों पर भीड़ जमा हो गई।
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फूंकीं पूर्व वित्त मंत्री की कोठी
- फोटो : फाइल फोटो
अगले दो दिन शहर में हालात कर्फ्यू जैसे हो गए। एमडीयू से लेकर छोटूराम चौक तक जाम की स्थिति बन गई थी। 19 फरवरी को भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया। रोहतक के अलावा झज्जर में सेना बुलानी पड़ी। दोपहर बाद भीड़ ने पूर्व वित्तमंत्री की कोठी में आग लगा दी।
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पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य
- फोटो : सर्वखाप पंचायत
भीड़ में कौन लोग शामिल थे? किसने शहर को जलाया? ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब शायद ही मिले। वजह, पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन की कोठी जलाने के केस की तरह ज्यादातर मामलों में आरोपी बरी हो चुके हैं।
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पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य
- फोटो : फाइल फोटो
20 फरवरी को कर्फ्यू भी हो गया बेअसर
रोहतक में हिंसा रोकने के लिए लगाया गया कर्फ्यू 20 फरवरी को बेअसर हो गया था। हालात संभालने के लिए शहर में सेना तक उतर आई थी लेकिन उपद्रवी किसी के काबू में नहीं आए थे। सड़कों पर अन्य दिनों के मुकाबले उपद्रवियों और सामान्य लोगों की भारी भीड़ उमड़ आई थी। हालात ऐसे बन आए थे कि सेना को भी बैकफुट पर जाना पड़ा था।
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का दृश्य
- फोटो : फाइल फोटो
21 फरवरी को संपत्ति बचाने उतरे थे लोग
हिंसा में एक दिन में झज्जर में पांच तो रोहतक में दो लोगों की जान चली गई थी। उपद्रवियों ने शहर में शोरूम, मॉल, स्कूल, मार्केट व सरकारी कार्यालयों तक में आग लगा दी थी। 21 फरवरी को मजबूरन लोगों को घरों से बाहर निकलकर अपनी संपत्ति बचाने के लिए आगे आना पड़ा।
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फूंकीं पूर्व वित्त मंत्री की कोठी
- फोटो : फाइल फोटो
जाट आरक्षण हिंसा-5 : कैप्टन अभिमन्यु कोठी केस में ये हुए बरी
कैप्टन अभिमन्यु कोठी जलाने के केस में मोहित सिंधु निवासी खेड़ी साध, जोगेंद्र उर्फ जोगा निवासी बालंद, समुंद्र उर्फ मोनू निवासी खेड़ी साध, राहुल दादु निवासी कबूलपुर, महेंद्र सिंह निवासी किलोई, संदीप कलकल, नरेंद्र निवासी बहुअकबरपुर, मनोज दूहन, अभिषेक, योगानंद, सुमित कोंधरवाल को बरी किया गया है।
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फरवरी 2016 में पूर्व वित्तमंत्री की कोठी से आग के बाद उठता धुआं
- फोटो : फाइल फोटो
साथ ही नसीब उर्फ ढीला निवासी खेड़ी साध, विकास निवासी बहुअकबरपुर, प्रदीप, लक्ष्य, विजेंद्र, रवींद्र उर्फ सोनू, अजय, दीपक व सुमित उर्फ हन्नी निवासी किलोई, प्रदीप लाल निवासी सुनारिया, प्रदीप, विक्की निवासी खेड़ी साध, कुलबीर निवासी प्रेमनगर, हरिओम निवासी नौनंद को बरी किया गया है।