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CWG 2022: अमित को मां ने कहा- ‘बेटा खोण नै म्हारे धौरे कुछ कोन्या, पाण खातर सोना सै, शेर की ढाल खेलणा’

Mon, 08 Aug 2022 04:06 AM IST
भूपेंद्र सिंह जयदेव डागर, संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक (हरियाणा)

सार

मैच शुरू होने से पहले अमित पंघाल की मां उषा देवी ने अमित से बात की थी। उन्होंने अमित को हौसला दिया। उनकी मां बोलीं कि आठ साल की उम्र में अमित को खेलने के लिए कोच को सौंप दिया था, पदक उसकी मेहनत का परिणाम है। 
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अमित पंघाल की जीत पर झूम उठे परिजन। - फोटो : सतीश कुमार, संवाद।
कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना बेहद गर्व की बात है। बेटे की जीत पर सात समुंदर पार देश के राष्ट्रगान की धुन बजना एक पिता के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है। यह बातें विजेंद्र सिंह ने बेटे अमित पंघाल के मैच जीतने के बाद खुशी व्यक्त करते हुए कही। वहीं मां उषा देवी ने मैच शुरू होने से कुछ देर पहले अमित से फोन पर बात की तो हौसला अफजाई करते हुए बोलीं ‘बेटा म्हारै धौरे खोवण खातर कुछ कोन्या, खुल कै खेलिये, पावण खातर सोना सै, शेर की ढाल खेलणा सै।’ वहीं मां के शब्दों को पूरा करते हुए अमित ने फाइनल मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड के खिलाड़ी कैरन मैकडोनाल्ड को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

अमित के बड़े भाई अजय रविवार सुबह ही 10 दिन की छुट्टी लेकर कोटा से हरियाणा के रोहतक में अपने गांव मायना पहुंचे। अजय ने कहा कि उनका मन कर रहा था छोटे भाई का फाइनल मैच परिजनों के बीच बैठकर देखा जाए। मैच देखने के लिए अमित के घर पर सुबह 11 बजे से ही ग्रामीण व परिजन जुटने लगे।
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अमित पंघाल की जीत पर झूम उठे परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मैच शुरू होने से कुछ देर पहले मौजूद लोग अपने-अपने इष्टदेवों को याद कर अमित के स्वर्ण जीतने की दुआ कर रहे थे। मैच के दौरान जैसे ही अमित विपक्षी खिलाड़ी को पंच लगा रहे थे वैसे ही घर के प्रांगण में बैठे लोग तालियों से जश्न मना रहे थे। मैच देखने वाले इतने गंभीरता से बैठे हुए थे कि मैच के दौरान अगर कोई बीच में कुछ बोल रहा था तो उसके पास बैठे अन्य लोग तुरंत उसको चुप करवा रहे थे। पदक जीतने के बाद माता-पिता, भाई व अन्य परिजनों के पास बधाई संदेश देने वालों की लगातार फोन आने लगे। 
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अमित पंघाल ने जीता गोल्ड मेडल। - फोटो : अमर उजाला
घर के प्रांगण में मैच देखने की अलग-अलग थी व्यवस्था 
मैच देखने के लिए परिजनों ने पहले से ही पूरी व्यवस्था कर रखी थी। महिलाएं घर के अंदर कमरे में लगे टीवी पर लाइव मैच देख रही थी। वहीं पुरुषों के लिए घर के प्रांगण में एलईडी स्क्रीन लगाया गया था। मैच खत्म होने के बाद जैसे ही रेफरी ने अमित का हाथ ऊपर उठाकर विजयी घोषित किया तो परिजन खुशी से उछल पड़े। मौजूद महिलाएं हरियाणवी गीतों पर थिरकने लगी। जीत की खुशी में एक-दूसरे को मिठाई खिलाने का सिलसिला शुरू हो गया। अमित के माता-पिता ही नहीं बल्कि चाचा-चाची, भाई-भाभी, ताऊ-ताई व अन्य जो भी वहां मौजूद थे सभी खुशी में झूम रहे थे। 

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अमित पंघाल - फोटो : सोशल मीडिया
आठ साल की उम्र से शुरू की बॉक्सिंग
मां उषा देवी ने बताया कि अमित आठ साल की उम्र से बॉक्सिंग खेल रहा है। उस समय गांव में ही स्थित बॉक्सिंग एकेडमी में कोच अनिल धनखड़ के पास खेलने की शुरुआत की थी। उसकी खेल क्षमता से प्रभावित होकर कोच अनिल ने शुरू से ही विशेष ध्यान दिया। जब अमित करीब आठ-नौ साल का था तो उसे कोच को सौंप दिया था। कोच के मार्गदर्शन व अमित की मेहनत के कारण अमित इस मुकाम तक पहुंच पाया है।
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पीठ पर बनवाया दादा का टैटू - फोटो : अमर उजाला
पीठ पर बनवाया दादा का टैटू 
अमित जब रिंग में उतरा तो सबकी नजर मुक्कों के साथ-साथ अमित की पीठ पर भी टिकी हुई थी। इसका कारण पीठ पर बना हुआ टैटू रहा। अमित के बड़े भाई अजय पंघाल ने बताया कि उनके दादा चौधरी जगराम का जून 2020 में स्वर्गवास हो गया था। बचपन से ही अमित दादा का सबसे लाडला था। दादा की याद में अमित ने पीठ पर टैटू बनवा रखा है।
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