अमृतपाल सिंह।
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कोड वर्ड था : बुआ जी रिनू बोल रही हूं, चाबी मैट के नीचे है
सूत्रों के अनुसार जब अमृतपाल व उसका साथी पपलप्रीत स्कूटी बलजीत कौर के घर छोड़कर निकले तो उस स्कूटी को पटियाला स्थित दुख निवारण गुरुद्वारे की पार्किंग में पहुंचाने का जिम्मा बलजीत कौर को ही दिया गया था। उसे पर्ची पर एक मोबाइल नंबर लिखकर दिया गया। जिस पर वहां पहुंचकर उसे कोड वर्ड में बोलना था, ‘बुआ जी मैं रिनू बोल रही हूं, स्कूटी खड़ी है चाबी मैट के नीचे है।’ जब बलजीत कौर वहां स्कूटी लेकर पहुंची और दिए गए संबंधित मोबाइल नंबर पर फोन कर कोड वर्ड बोला तो दूसरी ओर से मोबाइल पर किसी महिला ने कहा कि वह अभी वहीं रुके और उससे मिलकर जाए। वह दो मिनट में पहुंच जाएगी, मगर बलजीत कौर ने उसे मिलने से इनकार कर दिया और तुरंत शाहाबाद के लिए रवाना हो गई।