पहलगाम हमले में मारे गए करनाल के विनय नरवाल को परिवार इंजीनियर बनाना चाहता था। लेकिन उन्होंने बीटेक के तीसरे वर्ष में सैन्य अधिकारी बनने की ठान ली। नौसेना में पहले प्रयास में ही उन्हें सफलता मिल गई। डेढ़ साल पहले उनकी पदोन्नति हुई थी।
पहलगाम हमले में मारे गए करनाल के विनय नरवाल को माता-पिता इंजीनियर बनाना चाहते थे लेकिन बेटे की जिद ने उनके फैसले को पलट दिया और अपनी मेहनत और अभिभावकों के आशीर्वाद से नौसेना में भर्ती हो गया। शायद विनय की तकदीर में देश की सेवा लंबे समय तक नहीं लिखी थी। विनय पहलगाम में कायर आतंकियों की गोली का शिकार हो गया। परिवार के अनुसार, बीटेक के तीसरे वर्ष में विनय ने इंजीनियर की नौकरी न करने और सैन्य अधिकारी बनने का मन बनाया था। बेटे की इच्छा के आगे परिवार ने कोई सवाल नहीं उठाया और उसकी इच्छा को देखते हुए उसे तैयारी करने दी।
वायुसेना में हाइडल पायलट की नौकरी के लिए विनय ने दो बार प्रयास किया लेकिन हाइट के कारण चूक गया। इसके बाद उसे पहले ही प्रयास में नौसेना में नौकरी मिल गई। करीब डेढ़ वर्ष पहले ही उसे लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नति मिली थी। सेंट कबीर स्कूल से विनय ने पढ़ाई की। यहां हमेशा वह अपनी कक्षा में पहले या दूसरे स्थान पर रहा।
विज्ञापन
3 of 10
विनय नरवाल का अंतिम संस्कार
- फोटो : संवाद
पिता बोले, बेटे ने डैशिंग ऑफिसर के रूप में दीं सेवाएं
बेटे का संघर्ष सुनाते हुए पिता राजेश नरवाल का कई बार गला भर आया। विनय का सोनीपत के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला करा दिया था। यहां भी उनका शैक्षणिक गतिविधियों में शानदार प्रदर्शन रहा। उन्होंने बताया कि जैसे ही वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान तीसरे वर्ष में पहुंचा तो उसने उनसे कहा कि पापा मुझे इंजीनियर के रूप में नौकरी नहीं करनी और सरकारी अधिकारी बनना है। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे ने डैशिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दीं।
4 of 10
लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के घर पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
विनय के दादा और पत्नी हिमांशी से मिले मनोहर लाल
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के दादा के बातचीत के दौरान रोने और हिमांशी की पीड़ा सुनकर भावुक हो गए। मंत्री की आंखों में आंसू छलक आए। नेपाल दौरे को बीच में ही रद्द करते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री वीरवार को करनाल पहुंचे। उन्होंने पहलगाम में आतंकी हमले के शिकार हुए विनय नरवाल के सेक्टर-7 स्थित निवास परिजनों से मुलाकात की। जवान के निधन पर दुख प्रकट किया और परिजनों को सांत्वना दी।
विज्ञापन
5 of 10
विनय के दादा से मिलते मनोहर लाल
- फोटो : संवाद
उन्होंने कहा कि इस घड़ी में परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विनय को लंबे समय तक देश की सेवा करनी थी लेकिन आतंकवादियों ने बर्बरतापूर्वक गोली मारकर हत्या कर दी। हमले में लेफ्टिनेंट के अलावा 25 अन्य पर्यटक और एक नेपाल का पर्यटक भी मारा गया है। उन्होंने कहा, कश्मीर व अन्य प्रदेशों में नेपाल से प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक आते हैं, अगर पर्यटक सुरक्षित नहीं होंगे तो पर्यटन व्यवस्था में कठिनाई आएंगी।
विज्ञापन
6 of 10
विनय नरवाल का अंतिम संस्कार करती बहन
- फोटो : संवाद
शहीद का दर्जा देना केंद्र सरकार की नीति पर टिका
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का नाम अमर रहे, इसके लिए किसी मार्ग या स्थल का नामकरण किया जा सकता है। इस विषय पर वे प्रदेश सरकार से चर्चा करेंगे। परिवार की ओर से विनय के नाम पर मार्ग का नाम करने की मांग रखी गई थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी परिवार में शोक में है, बाद में इस विषय पर चर्चा होगी। पत्रकारों से बातचीत में ले. विनय को शहीद का दर्जा देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह विषय केंद्र की नीति पर आधारित है।
विज्ञापन
7 of 10
हमले के बाद सुरक्षाबल
- फोटो : पीटीआई
युद्ध में जान जाने पर शहीद का दर्जा मिलता है लेकिन ले. विनय के मामले में आतंकियों का बर्बरतापूर्ण अटैक है, जो भी भारत सरकार की नीति होगी उसी के तहत इस पर निर्णय होगा। पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये बातें डिप्लोमेटिक होती हैं।
8 of 10
हमले के बाद सुरक्षाबल
- फोटो : पीटीआई
गोली लगने के बाद मदद न मिलने के मामले पर लेंगे संज्ञान
बहन सृष्टि द्वारा उनके भाई को आतंकियों की गोली लगने के बाद करीब एक घंटे तक सड़क पर पड़े रहने और मदद न मिलने के मामले पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वहां कैसे घटना हुई, इसके प्रत्यक्षदर्शी तो वे ही हैं। जो घटना का जिक्र उन्होंने किया है, इसका नोटिस केंद्र और भारतीय सेना लेगी।
पर्यटकों पर आतंकी हमला, 26 की नृशंस हत्या
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी। 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं, जबकि दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक शामिल हैं।
टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी
हमले में करीब 14 लोग घायल हुए हैं। तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे।