सांकेतिक
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छात्राओं का यौन शोषण : चिंता कम-राजनीति ज्यादा
स्कूल जिसे ज्ञान का मंदिर कहा जाता है और ज्ञान देने वाले शिक्षक को ईश्वर के बराबर दर्जा दिया जाता है, लेकिन हरियाणा में हुई कुछ घटनाओं ने शिक्षक वर्ग पर ऐसा दाग लगाया है, जिसे धो पाना आसान नहीं होगा। साल की शुरुआत में ही फतेहाबाद की नौ छात्राओं ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया था। कारण था कि स्कूल वैन में चालक छेड़खानी करता था। फूहड़ गाने चलाता था। शिकायत करने पर स्कूल प्रबंधन ने कार्रवाई नहीं की।
इसके बाद भिवानी का जुई हो या कुरुक्षेत्र, जींद या फिर कैथल, कई जिलों से स्कूल में छात्राओं से छेड़खानी के मामले सामने आए। पिछले महीने सामने आए जींद के उचाना के एक राजकीय स्कूल में प्रिंसिपल द्वारा छात्राओं से छेड़खानी का मामला विधानसभा तक पहुंच गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब स्कूल की छात्राओं ने पांच पेज का एक शिकायत पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, महिला आयोग समेत कई अधिकारियों को भेजा। चिट्ठी पहुंचते ही प्रशासन हरकत में आ गया।
महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया। 30 अक्तूबर को उचाना पुलिस ने छात्राओं की शिकायत पर प्रिंसिपल पर मामला दर्ज किया। महिला आयोग, शिक्षा विभाग और पुलिस इस मामले की जांच की। जांच में 50 छात्राओं ने बयान दर्ज करवाए। उसके बाद प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में सरकार ने भी कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल को बर्खास्त कर दिया।
विधानसभा में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने एक दूसरे पर प्रिंसिपल को बचाने का आरोप लगाया। दोनों के आरोपों की जांच के लिए विधानसभा में तीन सदस्यीय एक कमेटी गठित की, जो बजट सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट देगी। वहीं, इस घटना के बाद कैथल के भी एक स्कूल का मामला सामने आया। छात्राओं से यौन शोषण के आरोप में पुलिस ने प्रिंसिपल को गिरफ्तार किया।