खाना बनाती महिला
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ऐतिहासिक महत्व के चिन्हों को भी प्रदर्शित किया गया
यहीं पर सिख धर्म की झलक भी देखने को मिलती है। स्वर्ण मंदिर के स्वरूप दर्शन के साथ सिख धर्म के दसों गुरुओं का संक्षिप्त परिचय यहां मिलेगा। सभी धर्मों के अतिरिक्त भारत के भक्ति काल की झलक देखने को भी मिलती है। महाकवि कालिदास, संत तुलसीदास, मीरा, संत कबीर, संत ज्ञानेश्वर, संत हरिदास, नामदेव और चैतन्य महाप्रभु की कलाकृतियां भक्ति काल की यात्रा चंद पलों में ही करवा देती हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर पुत्र संभाजी महाराज की प्रतिमा सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। चंद्रगुप्त मौर्य की प्रतिमा मौर्य वंश के गौरव का बखान करते हुए नजर आती है। यहीं पर सम्राट अशोक की प्रतिमा के साथ उनसे जुड़े ऐतिहासिक महत्व के चिन्हों को भी प्रदर्शित किया गया है। राजा विक्रमादित्य की अद्भुत प्रतिमा उनके वैभव और न्यायप्रिय शासन की गाथा का बखान करते हुए नजर आती है। महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान की चर्चा भी स्तम्भ में है। यहां पर बनाई गई गैलरी में महर्षि आर्यभट्ट, महर्षि कणाद, महर्षि नागार्जुन, महर्षि चरक, महर्षि सुश्रुत, आचार्य चाणक्य, महर्षि पतंजलि, महर्षि भास्कराचार्य, महर्षि अगस्त्य, महर्षि ब्रह्मगुप्त और महर्षि कपिल का उल्लेख देखने को मिलता है।