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कृषि कानूनों के विरोध में अपनी मेहनत को रौंद रहे किसान, अब भाकियू ने कही ये बात

Tue, 23 Feb 2021 12:13 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में अपनी फसल पर ट्रैक्टर चलाता किसान मंदीप। - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों के विरोध में भाकियू नेता राकेश टिकैत के खड़ी फसलों को नष्ट करने के की बात का असर हरियाणा में दिख रहा है। रोहतक के महम चौबीसी इलाके के गांव भैणी सुरजन के युवा किसान मंदीप ने अपनी साढ़े तीन एकड़ गेहूं की फसल नष्ट कर दी है। मंदीप ने कहा कि बाकी फसल को वह गांव के जरूरतमंदों को देगा। अपने लिए केवल दो-तीन एकड़ की फसल ही रखेगा। मंदीप का कहना है कि उसने साढ़े तीन एकड़ फसल कृषि कानूनों को समर्थन देने के लिए नष्ट की है। गांव के उन जरूरतमंदों को यह फसल इसलिए देना चाहता है कि हरवर्ग एकजुट होकर इस आंदोलन की गंभीरता समझे। मंदीप का कहना है कि सरकार कृषि और किसान को नष्ट करना चाहती है। वे कृषि कानूनों का विरोध इसलिए कर रहे हैं कि आने वाली पीढ़ी के लिए जमीन बच सके। वे आज कष्ट सह लेंगे, लेकिन किसी भी कीमत पर इन कानूनों को लागू नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि उनका पूरा गांव मंडी में इस वर्ष गेहूं नहीं देगा। कुछ जमीन के गेहूं को नष्ट करके चारा उगा लेंगे। बाकी जो नहीं कटेगी वह गांव के गरीबों को दे देंगे।
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किसान मंदीप सिंह। - फोटो : अमर उजाला
ठेके पर ले रखी है जमीन
गांव भैणी सुरजन का किसान मंदीप केवल डेढ़ एकड़ कृषि भूमि का मालिक है। वह लगभग 25 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती करता है। प्रति एकड़ तीस हजार रुपये प्रति वर्ष का ठेका दिया था। उसकी लगभग पूरी जमीन में गेहूं की ही फसल है। मंदीप के पिता रणबीर सिंह की मौत हो चुकी है और मां महम चीनी मिल में क्लर्क की नौकरी करती हैं। मंदीप अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं।
 
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हरियाणा में किसान जोत रहे खड़ी फसल। - फोटो : अमर उजाला
30 हजार रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा का हुआ नुकसान
किसान मंदीप का कहना है कि उसका 30 हजार रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। पूरे साल के 30 हजार प्रति एकड़ की जमीन ठेके पर थी। अगर आधा साल का भी हिसाब लगाया जाए तो एक फसल का 15 हजार रुपये ठेका बनता है। इसके अतिरिक्त मेहनत को भी छोड़ दिया जाए तो जमीन को तैयार करने, सिंचाई करने तथा खाद व बीज के प्रयोग में भी 15 हजार से अधिक का खर्च हो चुका है। प्रति एकड़ 50 हजार रुपये से अधिक के गेहूं की उम्मीद की जा रही थी। सही मायने में तो नुकसान 50 हजार से ज्यादा का हुआ है।

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हरियाणा में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाता किसान। - फोटो : अमर उजाला
वहीं यमुना से सटे मुंडोगढ़ी गांव के किसान साजिद ने सोमवार को अपनी पांच एकड़ गेहूं की फसल में ट्रैक्टर-हैरो से जुताई कर दी। ग्रामीणों ने उसे रोकने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माना। साजिद ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों का दुख उनसे देखा नहीं जा रहा। इसलिए उसने अपनी फसल की कुर्बानी दी है। गेहूं की फसल से बालियां निकल रही थी। अप्रैल में इस गेहूं के पकने पर कटाई हो जाती। साजिद ने कहा कि उसने सुना था कि अप्रैल में गेहूं कटाई शुरू हो जाएगी और किसानों का धरना-प्रदर्शन खत्म हो जाएगा। वह कृषि कानूनों के विरोध में है और फसल नष्ट कर अब आंदोलन में शामिल रहेगा। उसने कहा कि घरेलू जरूरत को देखते हुए कुछ फसल बचा ली है जिसकी उपज से उसका साल भर का गुजारा हो जाएगा। 
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राकेश टिकैत के संदेश के बाद किसान फसल जोत रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला
हरगिज न उठाएं ऐसा कदम : भाकियू 
किसान द्वारा फसल नष्ट करने के सवाल पर भाकियू जिलाध्यक्ष अजय राणा ने कहा कि अभी ऐसी नौबत नहीं आई कि फसल की कुर्बानी देनी पड़े। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी नहीं कहा है कि फसल की कुर्बानी दो। यदि ऐसी स्थिति आएगी तभी फैसला लिया जा सकता है। किसानों से अपील है कि कड़ी मेहनत व खर्च करके तैयार फसल की जुताई कतई न करें। इससे बड़ा नुकसान हो जाएगा। ऐसा कदम हरगिज न उठाएं। गेहूं जुताई की बात सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ है। वहीं घरौंडा की एसडीएम पूजा भारती ने कहा कि फसल जुताई करना कोई समस्या का हल नहीं है। मेहनत से फसल तैयार होती है उसे बर्बाद न करें। सभी को आंदोलन करने का अधिकार है। उनकी किसानों से अपील है कि ऐसा कदम न उठाएं।  
 
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