अक्सर सुनने और कहने में आता है कि बेटियां पिता को बहुत प्यारी होती हैं। इस बात को कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक विजेता हरियाणा के भिवानी के गांव धनाना की बेटी नीतू घणघस के पिता जयभगवान ने साबित किया है। नीतू के पिता जयभगवान विधानसभा में बिल मैसेंजर का काम करते हैं। वर्ष 2012 में नीतू ने मुक्केबाजी में सफर शुरू किया था और दो साल बीत जाने के बाद भी उसे कोई पदक नहीं मिल पाया। पदक न जीत पाने से हताश होकर नीतू निराश होकर अपने पिता के पास बैठी और कहा कि अब वह बॉक्सिंग नहीं करेंगी। तब पिता ने उसे समझाया और बेटी की काबिलियत पर विश्वास करते हुए उन्होंने बिना वेतन नौकरी करने का फैसला लिया।
वे पिछले सात साल से बिना वेतन के नौकरी कर रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल मैच में इंग्लैंड की डेमी जाडे को 5-0 से हराया। नीतू रिंग में प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को पंच जड़ रही थी, वहीं धनाना में परिजन खुशी से झूम रहे थे। परिजनों व ग्रामीणों ने लड्डूू बांटकर खुशी जाहिर की।
मां के हाथ का चूरमा और करेले की सब्जी पहली पंसद
नीतू की मां मुकेश देवी ने बेटी की जीत पर कहा कि बेटी ने गांव का नाम दुनिया में रोशन कर दिया, नाज सै मन्नै मेरी बेटी पै। ऐसी बेटी भगवान सबनै दै। मां ने बताया कि नीतू को उनके हाथ का बना देशी घी का चूरमा बहुत पसंद है। वह जब भी घर पर आती है तो उसके लिए हमेशा चुरमा बनता है। वहीं सब्जियों में करेला उसकी पहली पसंद है। रिंग में अभ्यास के साथ ही वह खाने-पीने का विशेष ध्यान रखती है, ताकि वजन में अधिक बढ़ोतरी न हो।