सुसाइड नोट।
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सुसाइड नोट में यह लिखा
आज की लास्ट बात, 26 अगस्त, आज मैं सुखविंद्र सिंह अपने जीवन की अंतिम बात लिख रहा हूं और मेरे तरफ से मेरे परिवार और दोस्तों को माफी। अगर मैनें कोई गलती हो तो यह मुझे मजबूरी में कदम उठाना पड़ रहा है और इसके पीछे सबसे ज्यादा सिर्फ दो बंदों (आदमियों ) का हाथ है। एक नाम बालकिशन ठाकुर व दूसरा कवि नरूला। साईं होंडा यमुनानगर का मालिक। दोनों मुझसे जबदस्ती 10 लाख रुपये मांग रहे हैं और अगर न दूं तो मेरे को और मेरे फैमिली को नुकसान पहुंचा देंगे। मैं एक गरीब परिवार से संबंध रखता हूं और बाल किशन मेरा बॉस इसका नाजायज फायदा उठाकर मुझे हर रोज नौकरी से निकालने की धमकी देता है।
जोकि मेरे मित्र और संबंधी है। आप सबसे निवेदन है कि हो सके तो इनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और इनको इफको टोक्यो के सभी सीनियर अधिकारियों से निवेदन है कि आप इस तरह का स्टाफ न रखें। जो अपने पर्सनल फायदे के लिए अपने सभी स्टाफ मैंबर्स को परेशान करते है। मुझे पता है कि यह मामला ऐसे ही दब जाएगा। इसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। क्यूंकि पैसे के पीछे सबकुछ दब जाता है और मैं अपने परिवार वालों से एक ही विनती करता हूं कि आप आपने जीवन को मेरे कारण खराब न करें, क्यूंकि मेरे स्थिति इन दोनों आदमियों ने बहुत खराब कर दी है।
जो बंदा अपनी मेहनत से तरक्की करता हैं उसका कोई साथ नहीं देता और अंतिम मेरा मैसेज मेरे सबसे नजदीकी परिवार के जो भी मेरा और मेरे घर में माता-पिता का है, उस पर मेरे दोनों भांजों का बराबर हक है। चाहे वह मेरे पिता जी की जमीन, घर और मेरे व मेरी पत्नी के खातों में पैसा है, मेरे दोनों भांजों मोहित और करनदीप में बराबर बांट दिया जाए। मेरी लास्ट इच्छा यह है कि आप इस कार्रवाई में दखल न दें। क्यूंकि बूरे इंसान के साथ कार्रवाई करने से आप बूरे मत बनो और अब मैं अपने परिवार, पिता जी, माता जी, पत्नी, दो बच्चों की तरफ से अंतिम माफी मांगता हूं। हमारी लाइफ में बाल किशन ठाकुर व कवि नरूला और उसके साथी जिम्मेदार हैं।