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पांच हत्या कर की आत्महत्या: बेटी के जन्मदिन का एक दिन पहले दिया था गांव में न्यौता, एक साथ जली छह चिताएं

Fri, 26 Aug 2022 11:44 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)

सार

एक ही परिवार के छह सदस्यों की एक साथ मौत ने लोगों को झंझोर कर रख दिया। परिवार में सबसे छोटी बेटी 5 वर्षीय आशू का शुक्रवार को जन्मदिन भी था।
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मृतकों के फाइल फोटो। जलतीं चिताएं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरियाणा के अंबाला के गांव बलाना में एक ही परिवार के छह सदस्यों की एक साथ मौत ने लोगों को झंझोर कर रख दिया। परिवार में सबसे छोटी बेटी 5 वर्षीय आशू का शुक्रवार को जन्मदिन भी था। एक दिन पहले जो परिवार बच्ची के जन्मदिन को लेकर खुशी-खुशी गांवभर में सगे संबंधियों को न्यौता दे रहा था, सुबह करीब 7 बजे उस परिवार के सभी लोगों के शव देखकर लोग की आंखें नम हो गई। परिजन फूट-फूट कर रोने लगे।

शाम के समय शमशान घाट में जैसे ही एक साथ  छह चिताएं जली तो हर आंख नम थी। सुखविंद्र के चाचा के लड़के ने सभी को मुख्ग्नि दी। बता दें कि बेटे सुखविंद्र सिंह ने दो व्यक्तियों द्वारा जबरन 10 लाख रुपये से मांगने के कारण परेशान होकर पहले तो अपने पिता 65 वर्षीय संगत राम, मां महिंद्रो कौर, पत्नी रीना, बच्ची 5 वर्षीय अस्मीत उर्फ आशु और 7 वर्षीय जसमीत उर्फ जस्सी को गला घोट कर मार डाला। हालांकि मारने से पहले जहरीला पदार्थ देने की बात सामने आ रही है।

बाद में सुखविंद्र ने खुद भी कमरे में पट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आग की तरह खबर फैलते ही गांव में मातम पसर गया। हालांकि पुलिस ने सुखविंद्र सिंह के जीजा सतीश कुमार की शिकायत पर सुसाइड नोट में लिखे नाम यानी बालकिशन और यमुनानगर के साईं होंडा के मालिक कवि नरूला की शिकायत पर धारा 302, 306 व 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया। डीएसपी जोगिंद्र शर्मा का कहना है कि  5 की गला घोंटकर हत्या की गई। उसके बाद सुखविंदर ने फंदा लगाकर सुसाइड किया। एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें 10 लाख रुपए जबरन मांगें जाने के आरोप लगाए गए हैं।
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सुसाइड नोट में बना फंदे से लटका छह लोगों का चित्र। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुसाइड नोट के सबसे ऊपर बनाए थे छह लोगों के फंदे से लटकने वाले चित्र 
गांव बलाना निवासी सुखविंद्र सिंह ने पहले ही परिवार के साथ-साथ खुद के खत्म करने का फैसला कर लिया था। इसका खुलासा सुसाइड मिलने से हुआ। सुसाइड नोट में अंतिम बातचीत के साथ-साथ ऊपर पैन से ही एक चित्र बनाया हुआ था। जिसमें छह लोग फंदे से लटके हुए बनाए थे। जो बेहद चौंकाने वाला था। जांच टीमों द्वारा सुसाइड नोट को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा, ताकि पता चल सके कि आखिर यह राइटिंग सुखविंद्र है कि नहीं। सुखविंद्र ने सुसाइड नोट के लिए एक डायरी का इस्तेमाल किया और दो पन्नों पर मौत के कारण के साथ-साथ अपनी जायदाद को भी बांट गया। 

यह डॉक्टर थे पोस्टमार्टम पैनल में शामिल 
  •  डॉ. निशांत हड्डी रोग विशेषज्ञ 
  •  डॉ. अरूण शर्मा हड्डी रोग विशेषज्ञ 
  •  डॉ. अल्पना महिला रोग शेषज्ञ 
  •  डॉ. सुमित खुखरेजा फोरेंसिंक एक्सपर्ट 
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पत्नी और बच्चों के साथ सुखविंदर सिंह। - फोटो : फाइल
बेटी के जन्मदिन होने के कारण गुरुद्वारे में रखवाया था सुखमणि साहिब का पाठ  
मृतक सुखविंद्र सिंह की बेटी के जन्मदिन वाले दिन ही पूरा परिवार खत्म हो गया। पड़ोसी दिलबाग व रिंकू ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब में सुखमणि साहिब का पाठ भी रखवाया गया था। परिवार व संगे संबंधियों को सुखविंद्र व उसकी पत्नी रीना न्यौता दे रही थी। सुखविंद्र के भांजे करनदीप ने बताया कि सुबह के समय जन्मदिन की बधाई देने के लिए ही फोन किया था लेकिन किसी ने नहीं उठाया।

काफी देर प्रयास करने के बाद भी फोन नहीं उठा तो पड़ोसियों को फोन किया। उन्होंने जाकर देखा तो इस मामले का खुलासा हुआ। बिटिया के जन्मदिन को लेकर परिवार बेहद खुश था। बता दें कि आशु 5 साल की है तो दूसरी बहन जस्सी करीब 7 साल की है। गांव के ही स्थानीय लोगों ने बताया कि सुखविंद्र खुश मिजाज का व्यक्ति और उसने उन्हें भी सुखमणि साहिब के पाठ के लिए बुलाया हुआ था। 

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अंबाला के गांव बलाना में जांच करते पुलिसकर्मी और मौके पर जुटी भीड़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
शादी से पहले था मोना, बाद में अमृतचखकर रखे थे केश  
पड़ोसी सुखविंद्र सिंह ने बताया कि सुखविंद्र सिंह पहले मोना था। करीब 9 साल पहले हुई शादी के बाद ही अमृत चखा था और पग डालने लगा था। पूजा पाठ भी नियमित तौर पर किया करता था। उधर, मौत की खबर लगते ही पत्नी रीना के मायके पक्ष वाले भी मौके पर पहुंचे और वो भी इस वारदात के बारे में सोचकर फूट-फूट कर रो रहे थे। उन्होंने कहा कि कभी उनके बीच लड़ाई झगड़े की बात नहीं सुनी थी। वह अपने परिवार के साथ बहुत खुश था। सुखविंद्र की पत्नी रीना कैथल के गांव भागलपुर की रहने वाली थी। 
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संगत सिंह व महिंद्रों कौर का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दादा जगीर सिंह से सुखविंद्र के पिता को मिली थी नंबरदारी  
गांव बलाना में नंबरदार परिवार का अच्छा रसूख है। दादा जगीर सिंह नंबरदार थे, उसके बाद यह जिम्मा सुखविंद्र सिंह के पिता संगत राम को मिला था। संगत राम कुल पांच भाई है। जिसमें से तीन भाई बलाना में ही रहते हैं और एक बड़ा भाई पिंजौर में रहता है। नंबरदार के साथ संगत राम जूतों की कंपनी में बतौर ठेकेदार थे और पहले यह कंपनी बलाना गांव में ही थी उसे बाद दुर्गा नगर नसीरपुर के पास चली गई थी। पिता कंपनी में भी जाया करते थे। 
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सुसाइड नोट। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुसाइड नोट में यह लिखा 
आज की लास्ट बात, 26 अगस्त, आज मैं सुखविंद्र सिंह अपने जीवन की अंतिम बात लिख रहा हूं और मेरे तरफ से मेरे परिवार और दोस्तों को माफी। अगर मैनें कोई गलती हो तो यह मुझे मजबूरी में कदम उठाना पड़ रहा है और इसके पीछे सबसे ज्यादा सिर्फ दो बंदों (आदमियों ) का हाथ है। एक नाम बालकिशन ठाकुर व दूसरा कवि नरूला। साईं होंडा यमुनानगर का मालिक। दोनों मुझसे जबदस्ती 10 लाख रुपये मांग रहे हैं और अगर न दूं तो मेरे को और मेरे फैमिली को नुकसान पहुंचा देंगे। मैं एक गरीब परिवार से संबंध रखता हूं और बाल किशन मेरा बॉस इसका नाजायज फायदा उठाकर मुझे हर रोज नौकरी से निकालने की धमकी देता है।

जोकि मेरे मित्र और संबंधी है। आप सबसे निवेदन है कि हो सके तो इनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और इनको इफको टोक्यो के सभी सीनियर अधिकारियों से निवेदन है कि आप इस तरह का स्टाफ न रखें। जो अपने पर्सनल फायदे के लिए अपने सभी स्टाफ मैंबर्स को परेशान करते है। मुझे पता है कि यह मामला ऐसे ही दब जाएगा। इसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। क्यूंकि पैसे के पीछे सबकुछ दब जाता है और मैं अपने परिवार वालों से एक ही विनती करता हूं कि आप आपने जीवन को मेरे कारण खराब न करें, क्यूंकि मेरे स्थिति इन दोनों आदमियों ने बहुत खराब कर दी है।

जो बंदा अपनी मेहनत से तरक्की करता हैं उसका कोई साथ नहीं देता और अंतिम मेरा मैसेज मेरे सबसे नजदीकी परिवार के जो भी मेरा और मेरे घर में माता-पिता का है, उस पर मेरे दोनों भांजों का बराबर हक है। चाहे वह मेरे पिता जी की जमीन, घर और मेरे व मेरी पत्नी के खातों में पैसा है, मेरे दोनों भांजों मोहित और करनदीप में बराबर बांट दिया जाए। मेरी लास्ट इच्छा यह है कि आप इस कार्रवाई में दखल न दें। क्यूंकि बूरे इंसान के साथ कार्रवाई करने से आप बूरे मत बनो और अब मैं अपने परिवार, पिता जी, माता जी, पत्नी, दो बच्चों की तरफ से अंतिम माफी मांगता हूं। हमारी लाइफ में बाल किशन ठाकुर व कवि नरूला और उसके साथी जिम्मेदार हैं। 
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मौके पर पहुंचे विधायक प्रतिनिधि एवं अन्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासनिक अधिकारी रहे नदारद, पार्टियों के नेता रहे शामिल
दिल दहला देने वाली घटना के बाद भले ही डीएसपी जोगिंद्र सिंह मौके पर पहुंचे हो लेकिन कोई दूसरा बड़ा प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। उधर, अलग-अलग पार्टियों के सदस्य परिवार के साथ खड़े नजर आए। मौके पर इनेलो शम्मी सौंडा, जेजेपी से प्रदेशाध्यक्ष विवेक चौधरी ललाणा, भाजपा अंबाला शहर विधायक रितेश गोयल आदि शामिल थे। 
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विलाप करते परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दोस्त बोले कि यारों का यार था सुखविंद्र
छावनी नागरिक अस्पताल में पहुंचे सुखविंद्र सिंह के दोस्तों ने नम आंखों से कहा कि दोस्तों की मदद के लिए हमेशा खड़ा रहता था। कभी किसी गांव के सदस्यों को यमुनानगर व उसके रास्ते में जाना होता था तो वह अपनी गाड़ी में लेकर जाता था और कई बार को 10-10 किलोमीटर से वापस भी लेने आ जाता था। उधर, सतीश ने बताया कि उसकी नौकरी भी सुखविंद्र सिंह ने लगवाई थी। वह उसके हर दुख सुख का साथी था।
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