योगी आदित्यनाथ।(फाइल)
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गोरक्षपीठ में योगी का जीवन धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा था। यद्यपि आदित्यनाथ सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाते। अगर कभी उठने में देर हो जाती तो उनके दरवाजे पर बड़े महराज की छड़ी की खटखटाहट सुनाई देने लगती। अवैद्यनाथ मंदिर के भ्रमण के दौरान योगी को अपने साथ रखते और हर शाखा-विद्यालय, कॉलेज, आयुर्वेद अस्पताल, विश्राम गृह, भंडारा आदि की जानकारी देते। भंडारे में दिन में दो बार 500 से अधिक लोगों को भोजन कराया जाता। इसमें मंदिर के कर्मचारियों, भक्तों, आंगुतकों सबका स्वागत है। गोरखपुर मंदिर के भंडारे में योगी ने ऐसा सबक सीखा, जिसे वह जीवन में कभी नहीं भूले।