gorakhpur
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थोड़ा आगे बढ़ने पर उन्हीं के विभाग के विनय श्रीवास्तव और पुनीत उमर भी मिले। वे ड्यूटी पर तैनात थे। प्लेटफॉर्म से बाहर निकलते ही एसी मैकेनिक देवेश सिंह मिले। बोले, गनीमत है कि रात में किसी की ड्यूटी नहीं लग रही है। प्लेटफॉर्म तीन से लेकर नौ तक ऐसा गजब का सन्नाटा है कि क्या बताएं। अजीब सा डर लगता है।
पता नहीं कब, पहले जैसी रंगत स्टेशन पर देखने को मिलेगी। यह कहते हुए देवेश ने नमस्ते कर और चल पड़े। देवेश और संजय की बातें दिमाग में घूम रही थीं। वाकई, एक ऐसी जगह जहां की अलग दुनिया होती थी, रात में भी चहल-पहल ही स्टेशन की शान थी। कोरोना के प्रकोप में अब वह शोरगुल दब गया। पता नहीं कितने दिन लगेंगे, वह रौनक लौटेगी या आगे भी यही सिलसिला चलेगा, कुछ ऐसे ही सवाल लिए मैं भी निकल पड़ा।