फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुनिया के सबसे लंबे प्लेटफॉर्म की बदली सूरत, लॉकडाउन ने कर दिया ऐसा हाल कि यकीन नहीं होगा

Sun, 03 May 2020 02:58 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 5
Gorakhpur Railway station - फोटो : अमर उजाला।
विश्व के सबसे लंबे प्लेटफार्म वाला रेलवे स्टेशन, जहां लॉकडाउन के पहले एक अलग दुनिया ही बसती थी। हर जाति, धर्म और मजहब के लोगों की भीड़ लगी रहती थी। जिस जगह की पहचान ही भीड़-भाड़ वाली थी, आज वहां ऐसा वीराना है कि कबूतरों ने उसे अपना अड्डा बना लिया है। गुंटर गूं की आवाजें और उनकी बीट से पटा प्लेटफार्म। अमर उजाला संवाददाता आपको वहां की आंखों देखी तस्वीर दिखाएंगे। 
विज्ञापन

2 of 5
Gorakhpur Railway station - फोटो : अमर उजाला।
अरे साहब, कहां आप घूम रहे हैं। जानी पहचानी आवाज सुनकर मैं ठिठका। पीछे मुड़कर देखा, रेलवे विद्युत विभाग के कर्मचारी संजय मालवीय मुस्कुराते हुए खड़े थे। मैंने हाथों के इशारे से प्लेटफार्म पर फैली बीट की ओर इशारा करते हुए इशारों में ही पूछा, ये क्या? वे बोले, दो-तीन दिन पहले आते तो उल्टी हो जाती। चारों ओर कबूतरों ने डेरा जमा रखा है। फर्श पर पड़ी बीट से इतनी बदबू आती कि तो मन घिना जाता है। अब तो सफाई हो रही है।
विज्ञापन

3 of 5
Gorakhpur Railway station - फोटो : अमर उजाला
जब मैंने, नजर उठाकर देखा तो शेड पर कबूतर ही कबूतर थे। चौतरफा गुंटर गूं की आवाजें आ रहीं थीं। फर्श पर धूल की परत थी और ट्रेन के आने पर जहां पांव रखने की जगह नहीं होती थी, वहां सांय-सांय करता सन्नाटा पसरा था। आदमी एक भी नहीं, परिसर में कुछ कुत्ते भी टहल रहे थे। शुक्रवार की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे का यह नजारा उस रेलवे स्टेशन का था, जिसके प्लेटफार्म की लंबाई 1355 मीटर है। जहां लॉकडाउन के पहले एक अलग दुनिया ही बसती थी। कहीं भागती जिंदगी तो कहीं दो जून रोटी की तलाश में घूमते कुली, टैक्सी वाले। 24 घंटे में सवा सौ ट्रेनें और 50 से ज्यादा मालगाड़ियां दौड़ती थी।

4 of 5
Gorakhpur Railway station - फोटो : अमर उजाला
अनाउंस सिस्टम पर हर वक्त ट्रेनों के आने-जाने की सूचनाएं प्रसारित होती थी। रोजाना एक से डेढ़ लाख की भीड़ यहां जुटती थी, लेकिन आज हालात बदले हुए थे। नजर घुमाने पर ड्यूटी बजा रहे आरपीएफ और जीआरपी के कुछ लोग तथा गिनती के मालगाड़ी व स्पेशल पार्सल ट्रेन को चलाने की जिम्मेदारी उठाने वाले रेलकर्मी थे।

बहरहाल, बातचीत आगे बढ़ी तो संजय ने बताया कि प्लेटफॉर्म एक और दो पर सफाई शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो कुत्तों को है। तीन-चार भूख-प्यास से मर चुके हैं। कुछ हैं वो भी कमजोर हो गए हैं। सुबह जब ड्यूटी पर आता हूं तो उनके लिए बिस्किट लेकर आता हूं। सबसे पहले उन्हें खिलाता हूं। बड़ी दया आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
gorakhpur - फोटो : अमर उजाला
थोड़ा आगे बढ़ने पर उन्हीं के विभाग के विनय श्रीवास्तव और पुनीत उमर भी मिले। वे ड्यूटी पर तैनात थे। प्लेटफॉर्म से बाहर निकलते ही एसी मैकेनिक देवेश सिंह मिले। बोले, गनीमत है कि रात में किसी की ड्यूटी नहीं लग रही है। प्लेटफॉर्म तीन से लेकर नौ तक ऐसा गजब का सन्नाटा है कि क्या बताएं। अजीब सा डर लगता है।

पता नहीं कब, पहले जैसी रंगत स्टेशन पर देखने को मिलेगी। यह कहते हुए देवेश ने नमस्ते कर और चल पड़े। देवेश और संजय की बातें दिमाग में घूम रही थीं। वाकई, एक ऐसी जगह जहां की अलग दुनिया होती थी, रात में भी चहल-पहल ही स्टेशन की शान थी। कोरोना के प्रकोप में अब वह शोरगुल दब गया। पता नहीं कितने दिन लगेंगे, वह रौनक लौटेगी या आगे भी यही सिलसिला चलेगा, कुछ ऐसे ही सवाल लिए मैं भी निकल पड़ा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें