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हिंदुत्व के प्रति लगाव ने बनाया आदित्य, इस कार्यक्रम में अवेद्यनाथ से पहली बार मिले थे योगी

Sat, 18 Jan 2020 01:29 PM IST
विजय जैन टीपी शाही/अमर उजाला, गोरखपुर।
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योगी और विश्व हिंदु परिषद् के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल बीमार महंत अवैद्यनाथ के साथ। - फोटो : अमर उजाला
स्कूल के दिनों से योगी आदित्यनाथ ही विद्यार्थी परिषद के वर्कर के रूप में कार्य करते थे। शायद यही वजह था कि हिंदुत्व के प्रति उनका लगाव शुरू से रहा। अक्सर वाद विवाद प्रतियोगिता में वह भाग लिया करते थे। विद्यार्थी परिषद का कोई कार्यक्रम था। जहां पर तबके गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
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स्कूल के दिनों में ऐसे दिखते थे सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला
उस कार्यक्रम में देश भर से आए कई छात्रों ने अपनी बात रखी। तबके योगी ने जब अपनी बात रखनी शुरू की तो लोगों ने खूब सराहना की गई। भाषण सुन अवेद्यनाथ जी महराज बहुत प्रभावित हुए। उन्हें अपने पास बुलाया। पूछा कहां से आए हो। जब उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के पौड़ी के पंचूर से तो उन्होंने कहा कि कभी मौका मिले तो मिलने जरूर आओ।
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दीक्षा प्रक्रिया पूरा करते हुए सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला
अवेद्यनाथ महराज भी उसी उत्तराखंड के रहने वाले थे। उनका गांव भी योगी के गांव से 10 किलो मीटर दूर था।  उस पहली मुलाकात से आज के योगी बहुत प्रभावित हुए। उनसे मिलने का वायदा कर के वहां से विदा लिए। उस मुलाकात के बाद योगी अवेद्यनाथ जी महराज से मिलने के लिए गोरखपुर आए। कुछ दिन बाद वह फिर अपने गांव लौट गए।

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कोटद्वार पी. जी. कॉलेज के अपने दोस्तों के साथ तारकेश्वर भ्रमण करते हुए सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला
वहां जाकर उन्होंने ऋषिकेश में ललित मोहन शर्मा कॉलेज के एमएससी में दाखिला ले लिया, पर उनका मन गोरखपुर स्थित गुरु गोरखनाथ की तप: स्थली की तरफ हमेशा घूमता रहता था। इसी बीच अवेद्यनाथ जी महराज बीमार पड़ गए। योगी उनसे मिलने पहुंचे। तब अवेद्यनाथ जी महराज ने उनसे कहा कि हम रामजन्म भूमि पर मंदिर के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। मैं, इस हाल में हूं यदि मुझे कुछ हो गया तो मेरे मंदिर को देखने वाला कोई नही होगा।
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योगी से महंत आदित्यनाथ की यात्रा पूर्ण हुई। - फोटो : अमर उजाला
तब योगी ने उनसे कहा कि आप चिंता न करें आप को कुछ नहीं होगा। मैं गोरखपुर जल्द आऊंगा। थोड़े दिन बाद अपनी मां को गोरखपुर जाने की बात कह कर घर से चल दिए। तब मां ने सोचा था बेटा शायद नौकरी के लिए जा रहा है। यह कह कर वह 1992 में गोरखपुर आ गए।
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