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साहब! मेट्रो बाद में चलाइएगा पहले जलभराव तो खत्म कराइए, ऐसा है गोरखपुर का हाल

Fri, 10 Jul 2020 04:49 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
साहब! मेट्रो बाद में चलाइएगा पहले जलभराव से तो निजात दिलाइए। थोड़ी देर की बारिश में ही 12 से 18 घंटे तक जलभराव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में न घर से निकल सकते हैं न ही कोई मेहमान आ पाता है। बारिश का मौसम शुरू होते ही पिछले साल का मंजर आंखों के सामने आ जाता है। बरसात के तीन-चार महीने बहुत मुश्किल से बीतते हैं।
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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
जलभराव के कारण जब घर से निकल ही नहीं पाएंगे तो मेट्रो का सुख कैसे भोग पाएंगे। मुख्यमंत्री तो गोरखपुर को देश के अन्य विकसित शहरों की तरह बनाने में जुटे हैं। नए-नए प्रोजेक्ट भी ला रहे हैं, लेकिन अफसर शहरवासियों को न तो मूलभूत सुविधाएं दे पा रहे हैं न उनकी परेशानियों को दूर कर पा रहे हैं।
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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
यह पीड़ा है बुद्ध विहार पार्ट ए, बी और सी के अलावा तारामंडल रोड के किनारे बने जीडीए कांप्लेक्स के दुकानदारों की। लोगों ने यह सोचकर शहर के अन्य इलाकों की तुलना में मंहगे दामों पर जीडीए की कॉलोनियों में जमीन लेकर बसना उचित समझा था कि वहां पर मूलभूत सुविधाएं बेहतर होंगी। मगर अब बहुत से लोग ऐसी कॉलोनियों में मकान बनवाकर खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
तारामंडल क्षेत्र स्थित जीडीए की सभी कॉलोनियों में करोड़ों की लागत से मकान बने हैं, लेकिन बारिश के दिनों में सड़कों आदि की हालत ग्रामीण क्षेत्रों से भी ज्यादा खराब हो जाती है। आधे घंटे की बारिश में सड़कें 12 से 14 घंटे तक के लिए तालाब बन जाती हैं। ड्रेनेज सिस्टम इतना खराब है कि नालों की सफाई का भी असर नहीं पड़ रहा। बृहस्पतिवार की ही बात करें तो सुबह थोड़ी देर की बारिश में ही जो जलभराव हुआ वह देर शाम तक जस का तस बना रहा।
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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
इन कॉलोनियों में रहते हैं 20 हजार लोग
शहर क्षेत्र में बनी जीडीए कॉलोनियों में करीब 20 हजार लोग रहते हैं। ज्यादातर आबादी बारिश में जलभराव की समस्या झेलती है।

मूलभूत सुविधाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं
बुद्ध विहार पार्ट ए निवासी विवेक अग्रवाल ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं की तरफ जिम्मेदारों का ध्यान ही नहीं जा रहा। जीडीए दफ्तर के ठीक सामने बुद्ध विहार पार्ट ए कॉलोनी है। प्राधिकरण के सभी अफसर रोजाना इसी कॉलोनी से होकर दफ्तर आते-जाते हैं, मगर किसी को भी जलभराव नहीं दिखता जबकि कॉलोनी के लोग परेशान हैं।
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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
घर से बाहर नहीं निकल सकते
बुद्ध विहार पार्ट बी निवासी डॉ. योजना अग्रवाल ने बताया कि प्राधिकरण की कॉलोनी में यह सोचकर मकान बनवाया कि सभी तरह की जरूरी सुविधाएं मिलेंगी। सड़क, नाली, बिजली के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे मगर बारिश में पूरी कॉलोनी की हालत बहुत खराब हो जाती है। जलभराव से न तो घरों से बाहर निकल सकते हैं न कोई घर आ सकता है।
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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
गर्मी में उड़ती है धूल, बारिश में सताता है जलभराव
बुद्ध विहार पार्ट सी निवासी रत्नेश पांडेय ने बताया कि गर्मी के दिनों में अवैध खनन करने वाली गाड़ियां धूल उड़ाती हैं। बारिश में जलभराव परेशान करता है। समय से नालों की सफाई नहीं होने या ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं होने से थोड़ी सी बारिश में कॉलोनी और सर्विस लेन पर एक से डेढ़ फीट तक पानी लग जाता है। गाड़ी भी घर से नहीं निकल सकती है।

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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
बारिश होते ही बंद हो जाती हैं दुकानें
बारिश के मौसम में 30 से 15 दिन तो दुकान बंद रखनी पड़ती है। अगर खुलती भी है तो जलभराव की वजह से दुकान तक काई पहुंच ही नहीं पाता। दिन भर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं।  थोड़ी सी बारिश में सर्विस लेन पर डेढ़ फीट से अधिक जलभराव हो जाता है। पूरे शॉपिंग कांप्लेक्स तक पहुंचने का कोई रास्ता ही नहीं रह जाता। - शैलेंद्र, जीडीए शॉपिंग कांप्लेक्स, तारामंडल रोड
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gorakhpur weather - फोटो : अमर उजाला।
नालों से लेकर नालियों तक की कराई गई है सफाई
जीडीए उपाध्यक्ष अनुज सिंह ने बताया कि तारामंडल रोड के आसपास के इलाकों में जलभराव को देखते हुए न केवल उन इलाकों बल्कि प्राधिकरण ने अपनी सभी कॉलोनियों से होकर गुजरने वाले नाला-नालियों की सफाई कराई गई है। अब पहले की तरह जलभराव देर तक नहीं रह रहता है। ज्यादा बारिश होने की दशा में प्राधिकरण की तरफ से वाटर पंप लगाकर भी पानी निकाला जाता है। प्राधिकरण की कॉलोनियों में रहने वालों की पूरी चिंता की जाती है। अगर कहीं ज्यादा समय तक जलभराव है तो जांच कराकर निस्तारण करा दिया जाएगा। लोग खुद भी शिकायत कर सकते हैं तत्काल पानी निकलवाने की व्यवस्था की जाएगी। दुकानदारों को चाहिए कि नाले में पॉलीथिन न डालें।
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