फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी के इस 'वृंदावन' में अब नहीं होती है रासलीला, तस्वीरों में देखें इसकी एक झलक

Thu, 31 Dec 2020 12:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर।
विज्ञापन
1 of 6
कुशीनगर वृंदावन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
मथुरा के अलावा एक वृंदावन कुशीनगर जिले के पडरौना में भी है। इसे वर्ष 1835 में बसाया गया था। तत्कालीन राजा बहादुर ईश्वरी प्रताप नारायण सिंह ने राजमहल के बगल में वृंदावन का निर्माण करवाया था। करीब 15 एकड़ क्षेत्रफल के मंदिर परिसर में ही वृंदावन की मिट्टी और कदंब के पौधे लाकर लगाए गए थे। इसके एक तरफ रासलीला होती थी, जिसे वृंदावन में बैठे महल के लोग देखते थे और चहारदीवारी से कुछ दूरी पर आम जनता देखती थी। हालांकि अब यहां रासलीला नहीं होती है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

 
विज्ञापन

2 of 6
कुशीनगर वृंदावन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
इस वृंदावन में कदंब का एक विशाल पेड़ भी है। कहा जाता है कि उसके छिलके हटाने पर राम राम की आकृति उभरकर आती थी। राजस्थान के काले और सफेद संगमरमर से बनी राधा बल्लभ जी की मूर्ति आज भी है। इस मंदिर में संगमरमर पर बनी बेजोड़ नक्काशी उस समय की कला को आज भी जीवंत बनाए हुए है।

 
विज्ञापन

3 of 6
कुशीनगर वृंदावन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
यहां की फलों और सब्जियों का लगता है भोग
मंदिर परिसर में बागवानी और सब्जियों की खेती होती है। फूल भी लगाए गए हैं, जो सिर्फ राधा बल्लभ (राधे-कृष्ण) को भोग लगाए जाते हैं। इस मंदिर को ठाकुर जी का मंदिर भी कहते हैं। उस जमाने में यहां दो कुएं खुदवाए गए थे, जिनसे पानी की सभी आवश्यकताए पूरी होती थी। उन कुओं के अवशेष आज भी हैं।

 

4 of 6
कुशीनगर वृंदावन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
उसी समय का है पडरौना का रामधाम पोखरा और चीनी मिल
वर्ष 1836 में ही रामधाम पोखरा का निर्माण कराया गया था। यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नान घर बनवाए गए थे, जो आज भी हैं। पडरौना राजपरिवार की तरफ से ही वर्ष 1933 से 1935 के बीच पडरौना, खड्डा और कठकुइयां चीनी मिलों की स्थापना की गई थी। पडरौना चीनी मिल और इससे संबद्ध फर्मों की स्थापना ठाकुर जी के नाम पर श्रीकृष्ण शुगर मिल के नाम से की गई थी।


 
विज्ञापन

5 of 6
कुशीनगर वृंदावन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
पडरौना राज परिवार के कुंवर अनिल प्रताप नारायण सिंह बताते हैं कि मंडी और वृंदावन की स्थापना राजपरिवार ने कराई थी। यहां वृंदावन बसाने के लिए मथुरा वृंदावन में जमीन खरीदकर वहां से मिट्टी और कदंब के पौधे लाए गए थे। इस क्षेत्र को भगवान श्री कृष्ण की लीला के लिए बनाया गया था। यहां रोज रात में रासलीला होती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
कुशीनगर वृंदावन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
यहां अलग से भगवान विष्णु की मूर्ति और सिंहासन भी बनवाया गया था। मूर्ति चोरी हो गई, लेकिन सिंहासन अभी भी है। कुछ वर्ष पूर्व कदंब के विशाल पेड़ को छंटवा देने के बाद छिलके के नीचे राम-राम की आकृति दिखनी बंद हो गई। समय के साथ रासलीला देखने वालों की संख्या भी बहुत कम हो गई। ऐसे में इसे बंद करना पड़ा। यहां की विशेषताओं की जानकारी मंदिर के पुजारी राधा कृष्ण पांडेय के वंशज राजीव कुमार पांडेय और महेश सैनी ने भी दी।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें