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UP: 'वो बेहद शांत, गंभीर स्वभाव के थे... उनमें ये खासियत भी थी', डॉक्टर अबिषो की खुदकुशी से साथी भी हैरान

Tue, 15 Jul 2025 03:44 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

डॉ. अबिषो के साथ पढ़ाई करने वाले एक अन्य जूनियर रेजिडेंट ने बताया कि वह अक्सर कॉल रिकॉर्डिंग ऑन रखते थे और अपनी बातचीत रिकॉर्ड किया करते थे। उनके मोबाइल फोन की कॉल रिकॉर्डिंग से यह पता चल सकेगा कि उनकी किससे क्या बात हुई है। 
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डॉ व उसकी पत्नी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग में जूनियर रेजिडेंट के रूप में कार्यरत डॉ. अबिषो की मौत से डॉक्टर और छात्र हतप्रभ हैं। मौत से कुछ देर पहले उनके साथ भोजन करने वाले जेआर डॉ. सुनील मद्धेशिया इस घटना के बाद से गहरे सदमे में हैं। उन्हें कॉलेज प्रशासन ने छुट्टी देकर घर भेज दिया है। वहीं मामले की जांच के लिए डॉ. सुनील आर्या की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी गई है।

11 जुलाई को हुई घटना के बाद सोमवार को भी परिसर में पूरे दिन चर्चा चलती रही। डॉ. अबिषो के शिक्षकों, साथियों एवं जूनियरों में से किसी को यह समझ नहीं आ रहा कि हर वक्त शांत और सामन्य रहने वाले जूनियर रेजिडेंट के साथ अचानक ऐसा क्यों हो गया। अगर जूनियर रेजिडेंट ने आत्महत्या कर ली तो उसकी क्या वजह हो सकती है? अगर वह अवसाद में थे तो ऐसी कौन सी परिस्थिति थी, जिसको साथ रहने वाले भी नहीं भांप सके।
 
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पत्नी डॉ. निमिषा के साथ डॉॅ. अबिषो डेविड। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेडिकल कॉलेज में चल रही चर्चाओं के अनुसार, डॉ. अबिषो ने आत्महत्या से एक दिन पहले यानी 10 जुलाई की दोपहर दो बजे से रात आठ बजे तक आईसीयू में ड्यूटी की। रात में सर्दी-जुकाम की बात कहकर हॉस्टल चले गए। वहां सबसे करीबी मित्र और जूनियर रेजिडेंट डॉ. सुनील मद्धेशिया के साथ उनके कमरे में बैठकर रात में ढाई बजे तक पढ़ाई की।

 
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डॉक्टर ने पत्नी को भेजी थी सेल्फी - फोटो : अमर उजाला
डॉ. अबिषो के जूनियर डॉ. अल्ताब ने बताया कि वह बेहद शांत, गंभीर और समर्पित स्वभाव के थे। कभी कोई ऐसा लक्षण नहीं दिखा, जिससे लगे कि वह किसी प्रकार के तनाव में हैं। डॉ. अबिषो के शोध-निर्देशक डॉ. सुनील आर्या ने बताया कि उनका शोध कार्य पूरा हो चुका था और उससे संबंधित प्रपत्र भी जमा कर दिए थे। 

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मृतक डॉॅ. अबिषो डेविड की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कभी भी किसी समस्या का जिक्र नहीं किया। हर कार्य को दक्षता के साथ पूरा करना डॉ. अबिषो की खासियत थी। वह बिल्कुल सामान्य बातचीत करते थे और अपने घर आने के लिए भी आमंत्रित कर चुके थे।

 
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डॉक्टर के कमरे में मिला इंजेक्शन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जूनियर से मंगाई दवा खुद लेने निकले थे बाहर
रात करीब तीन बजे डॉ. अबिषो ने एक जूनियर छात्र से बुखार की दवा मंगवाई। यह दवा एक इंजेक्शन में थी। जूनियर डॉक्टर ने बताया कि वह हॉस्टल जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मुलाकात डॉ. अविषो से हो गई। वह इसी दवा के लिए हॉस्टल से बाहर निकले थे। तब इस बात का कतई भी अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी।
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डॉक्टर के कमरे की जांच करती पुलिस व फॉरेंसिंक की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग से बची हैं उम्मीदें
डॉ. अबिषो के साथ पढ़ाई करने वाले एक अन्य जूनियर रेजिडेंट ने बताया कि वह अक्सर कॉल रिकॉर्डिंग ऑन रखते थे और अपनी बातचीत रिकॉर्ड किया करते थे। उनके मोबाइल फोन की कॉल रिकॉर्डिंग से यह पता चल सकेगा कि उनकी किससे क्या बात हुई है। हो सकता है कि उस बातचीत से ऐसी कोई जानकारी मिले, जिससे मौत का राज खुल जाए। फोन की कॉल रिकार्डिंग से डॉक्टर के मन की स्थिति और किसी संभावित मानसिक दबाव की जानकारी सामने आ सकती है।
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कमरे की जांच करती टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस संवेदनशील मामले की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इसमें अध्यक्षता एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सुनील आर्या करेंगे। जबकि, डॉ. शहनवाज और डॉ. सुरेंद्र को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

 

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हॉस्टल के कमरे में रहते थे डॉक्टर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डॉ. अबिषो का हुआ अंतिम संस्कार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट डॉ. अबिषो डेविड का सोमवार को केरल में उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं, मौत का कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए नमूने को फॉरेंसिक लैब भेजा गया। डॉ. अबिषो के ससुर ने बताया कि सोमवार सुबह शव केरल में उनके पैतृक गांव पहुंचा। वहां पत्नी निमिष समेत परिवार के अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
 

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इसी हॉस्टल के कमरे में हुई मौत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं इस मामले को लेकर पुलिस की सक्रियता भी बढ़ी रही। फॉरेंसिक जांच के लिए एकत्रित नमूने को लैब भेजा गया। इसकी रिपोर्ट से यह पता लगेगा कि इंजेक्शन के जरिए कौन सी दवा ली गई थी। कहीं किसी दवा की ओवरडोज या रिएक्शन तो नहीं है।

 

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मेडिकल कॉलेज के इसी हॉस्टल में रहते थे डॉक्टर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कॉल डिटेल भी खंगाल रही पुलिस
इस मामले में पुलिस ने अब तक हॉस्टल में जूनियर रजिडेंट के साथ भोजन करने वाले, दवा लाने वाले, ड्यूटी के लिए बुलाने गए जूनियर समेत कई लोगों का बयान दर्ज किया है। इसके साथ ही डॉक्टर के मोबाइल नंबर पर घटना के दिन किन-किन लोगों ने फोन किया, उसका भी डिटेल एकत्रित किया जा रहा है।
 

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मृतक डॉक्टर के भाई - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तनाव के मुख्य कारण
- एमबीबीएस और पीजी की बेहद कठिन पढ़ाई, निरंतर परीक्षा, क्लासेस और क्लिनिकल ड्यूटी से समय का अभाव।
- कई बार छात्रों को आवश्यक अंकों से कम नंबर मिलने पर उसी कक्षा में रोका जाता है, जिससे उनमें आत्मग्लानि और हीन भावना पैदा होती है।
- दूर-दराज के छात्रों को घर से दूर रहना, अकेलापन और भावनात्मक सहयोग की कमी
- अनियमित शेड्यूल, नाइट ड्यूटी और पढ़ाई के दबाव के चलते नींद पूरी न होना।

 

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मृतकचिकित्सक का भाई सीओ गोरखनाथ के साथ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. तपस कुमार आइच बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण काउंसलिंग की जरूरत महसूस करने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है। एमबीबीएस और पीजी छात्र ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों में कार्यरत जूनियर रेजिडेंट और सीनियर डॉक्टर भी मानसिक तनाव के शिकार हैं। कई बार उन्हें नींद नहीं आती, चिड़चिड़ापन रहता है, और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बनी रहती है। इसका उपचार लेने के लिए आते है। जिन्हें उचित परामर्श और इलाज किया जाता है। छात्रों को अपनी मानसिक समस्याएं खुलकर बतानी चाहिए। -तापस कुमार आइच- विभागाध्यक्ष मानसिक रोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
 
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चिकित्सक के परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह घटना दुखद है। एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले छात्रों में कई दूसरे प्रदेशों से होते हैं। उन्हें नए माहौल से परिचित कराने के लिए एक महीने तक ओरिएंटेशन प्रोग्राम चलाया जाता है। वहीं चारों वर्षों के छात्रों के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम लागू है, जिसमें वे अपने शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक समस्याएं अपने मेंटर से साझा कर सकते हैं।-डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य
 
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