गोरखपुर में पकड़ा गया फर्जी आईएएस गौरव कुमार सिंह का ख्वाब पूरा नहीं हुआ तो वह 'ख्वाब' में ही जीने लगा। किस्मत से निराश गौरव ने पहले खुद को आईएएस घोषित किया, इसके बाद फर्जी पहचान बनाई। 2022 में वह सीतामढ़ी में आदित्य सुपर-50 नाम से कोचिंग में पढ़ाने लगा। यहीं से उसकी ठगी की राह शुरू हुई।
बिहार के सीतामढ़ी जिले के मेहसौल गांव का गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर करोड़ों की ठगी करने वाले फर्जी आईएएस के रूप में सुर्खियों में है। उसकी जालसाजी की शुरुआत उसके संघर्ष भरे छात्र जीवन से ही हो चुकी थी।
उसके पिता चलितर राम पेंट पालिश कर परिवार चलाते थे। बचपन में पढ़ाई के साथ गौरव मजदूरी और पेंट-पालिश भी करता था। अभावों में पला-बढ़ा गौरव हमेशा बड़ा अफसर बनने का सपना देखता था। सफलता नहीं मिली तो फर्जी आईएएस बनकर फर्जीवाड़ा करने लगा।
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फर्जी आईएएस गौरव कुमार सिंह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस की जांच में पता चला कि 2019 में उसने मैथ्स से एमएससी पूरी की। बड़ा अफसर बनने के सपने के साथ उसने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। तीन साल की मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिली। आर्थिक दबाव बढ़ा तो 2022 में वह सीतामढ़ी में आदित्य सुपर-50 नाम से कोचिंग में पढ़ाने लगा।
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फर्जी आईएएस के घर लगी नेमप्लेट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यहीं से उसकी ठगी की राह शुरू हुई। कोचिंग में पढ़ने वाले एक छात्र से उसने नौकरी लगाने के नाम पर दो लाख रुपये ले लिए। नौकरी न लगने पर छात्र ने प्राथमिकी दर्ज करा दी।
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फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राथमिकी ने तोड़ दिए सारे सपने
गौरव ने पुलिस कस्टडी में बताया कि उस दर्ज प्राथमिकी ने उसके सारे सपने तोड़ दिए। पढ़ाई बची न कॅरिअर। लगा अब जिंदगी बर्बाद हो चुकी है। यही निराशा उसे गलत रास्ते पर ले गई।
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फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राथमिकी के बाद वह करीब एक साल अंडरग्राउंड रहा। इसी दौरान उसने सोचा कि जब असली आईएएस नहीं बन सकता तो फर्जी ही सही। कुछ महीनों बाद वह नए रूप में सामने आया और परिचितों को बताया कि उसका सिविल सेवा में चयन हो चुका है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी फर्जी आईएएस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
धीरे-धीरे बढ़ाया नेटवर्क
इसके बाद उसने फर्जी पहचान, सोशल मीडिया प्रोफाइल, नेमप्लेट और सरकारी अफसर की छवि तैयार कर ली। धीरे-धीरे उसने नेटवर्क बढ़ाया और यही जालसाजी आगे चलकर करोड़ों की ठगी के बड़े रैकेट में बदल गई।
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गनर के साथ चलता फर्जी आईएएस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कोचिंग टीचर से ठग बना शातिर, फर्जी पहचान और रुतबा दिखाकर लोगों के करता था करोड़ों की ठगी
गोरखपुर में 200 करोड़ रुपये का सरकारी ठेका दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार की लग्जरी लाइफ और ठगी के नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी का मासिक खर्च 5 लाख रुपये से अधिक था।
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फर्जी आईएएस की लाल बत्ती लगी गाड़ी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महंगी गाड़ियां और 10 गनर, निजी मैनेजर
खुद को 2022 बैच का आईएएस बताने वाला ललित किशोर महंगी गाड़ियों, 10 गनरों, निजी मैनेजर, किराए के होटल और एलीट लाइफस्टाइल के दम पर लोगों को आसानी से भरोसे में ले लेता था। शातिर ठग ललित किशोर मूलरूप से सीतामढ़ी (बिहार) के मेहसौल का रहने वाला है।
सुपर 100 कोचिंग सेंटर में था गणित का शिक्षक
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले सीतामढ़ी में सुपर 100 कोचिंग सेंटर में गणित का शिक्षक था। वर्ष 2023 में वह एडमिशन के नाम पर दो लाख रुपये लेने के आरोप में कोचिंग से निकाल दिया गया। एमएससी के बाद वह मैथ से पीएचडी कर रहा था, लेकिन इसी दौरान उसने फर्जी पहचान और दिखावे के सहारे ठगी का रास्ता अपना लिया।
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फर्जी आईएएस का घर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वर्ष 2016 में उसके खिलाफ सीतामढ़ी के रीगा थाने में युवती को बहला फुलसा कर भाग ले जाने के मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जो वर्तमान में उसकी पत्नी है। जिससे दो बच्चे भी हैं। पिछले पांच महीनों से वह चिलुआताल थाना क्षेत्र में किराए के मकान में पत्नी, दो बच्चों और साले के साथ रह रहा था।
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फर्जी आईएएस का घर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किराए पर गनर, मैनेजर और महंगी गाड़ियां
एसपी सिटी के अनुसार ललित हमेशा 10-12 गनरों के साथ चलता था। प्रत्येक को वह 30 हजार रुपये मासिक देता था। इसके अलावा उसने एक मैनेजर रखा था, जिसे 60 हजार रुपये महीने मिलते थे। उसके पास स्कॉर्पियो और अर्टिगा दो लग्जरी वाहन थे, जिनकी 30-30 हजार रुपये ईएमआई हर महीने जमा करता था। गोरखपुर के होटलों में वह 30 हजार रुपये मासिक रूम रेंट खर्च करता था। यहीं नहीं सरकारी अधिकारी जैसी छवि बनाने के लिए वह सरकारी कार्य पर लिखी निजी गाड़ियों का इस्तेमाल करता था। जहां भी जाता, गनरों की टोली और स्टाफ लेकर पहुंचता, जिससे लोग उसे असली आईएएस समझ लेते थे।
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गिरफ्तार आरोपियों से बरामद सामान और जानकारी देते पुलिस अधिकारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक पत्नी और चार प्रेमिकाएं, तीन गर्भवती
जांच में सामने आया है कि आरोपी की निजी जिंदगी भी उतनी ही चौंकाने वाली है। उसकी एक पत्नी व चार प्रेमिकाएं हैं। जिसमें तीन गोरखपुर और एक सीतामढ़ी की रहने वाली है। जिनमें तीन गर्भवती पाई गई हैं। आरोपी जालसाज इन सभी पर वह महंगे मोबाइल, ज्वैलरी और लाखों रुपये खर्च करता था। महंगे कपड़े और ब्रांडेड चीजों का शौकीन आरोपी अपने आपको हाई प्रोफाइल अधिकारी दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ता था।
चिलुआताल में किराए के मकान में चल रहा था पूरा खेल
पिछले पांच महीनों से आरोपी अपनी पत्नी, दो बच्चों और साले के साथ चिलुआताल थाना क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। यहीं से वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से ठगी का नेटवर्क चला रहा था। वह पिछले पांच माह में भटहट, पीपीगंज, कैम्पियरगंज और अन्य क्षेत्रों के स्कूलों में भी फर्जी आईएएस बनकर निरीक्षण करने गया था। छात्रों की बोर्ड परीक्षा के दौरान वह दो लग्जरी गाड़ियों और गनरों के काफिले के साथ पहुंचा था। हालांकि अभी तक स्कूलों से धन उगाही की शिकायतें नहीं आई हैं।
दस्तावेज बनाने के लिए एआई तकनीक का करता था इस्तेमाल
आरोपी एआई तकनीक का इस्तेमाल कर मीटिंग लेटर, मंत्रालय के नोट, नियुक्ति आदेश, अनुमोदन पत्र, दिखाकर वह पीड़ितों को पूरी तरह भ्रमित कर देता था। यहीं नहीं लोगों को झांसे में लेने के लिए एआई तकनीक की मदद से अधिकारियों की मीटिंग से उनका फोटो हटा अपना फोटो लगा देता था। आरोपी के पास से देवरिया जिलाधिकारी की मीटिंग का भी फोटो बरामद हुआ है।
एसएसपी के निर्देश पर पुलिस आरोपी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कौन शामिल था और अब तक उसने कितने लोगों को निशाना बनाया है।-अभिनव त्यागी, एसपी सिटी