इन दिनों एक ही राशि में चार ग्रह गोचर कर रहे हैं। सूर्य, बुध, शुक्र और राहु वृषभ राशि में विराजमान हैं। यह संयोग बहुत ही शुभ फल देने वाला होता अगर वृषभ राशि में राहु न होते तो। वृषभ राशि में राहु के होने से शुभ फल देन वाले सूर्य, बुध और शुक्र ग्रह संक्रमित हो गए हैं जिससे वह विपरीत परिणाम दे रहे हैं। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में शुक्र वृष राशि में आ गए थे। इससे पहले बुध और राहु इसी राशि में थे। इन तीन ग्रहों के बाद 14 मई को सूर्य भी वृष राशि में आ गए हैं। अब इन 4 ग्रहों की युति 25 मई तक बनी रहेगी। इन ग्रहों के कारण देश में उथल-पुथल बनी रहेगी। देश की जनता में असंतोष रहेगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
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किसी न किसी तरह परेशानी बनी रहेगी। इसके साथ ही इन ग्रहों के कारण राजनीति और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए मुश्किलों वाला समय रहेगा।
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देश की सीमाओं पर तनाव बढ़ सकता है, लेकिन सितारों के शुभ फल से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि में सुधार होगा। अर्थव्यवस्था भी मजबूत होने के योग बन रहे हैं।
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शनि की राशि में है बृहस्पति का गोचर
बृहस्पति का अपने शत्रु ग्रह शनि की राशि कुंभ में विराजमान हैं। ऐसे में बृहस्पति का शनि की राशि में गोचर होने से गुरु का एक राशि में रहने का समय और बढ़ गया है। इस कारण से गुरु का अशुभ असर बढ़ेगा।
गुरु के प्रभाव से देश में महामारी से परेशानी तो रहेगी लेकिन उसका अशुभ असर 20 जून के बाद धीरे-धीरे कम होता जाएगा। देश में शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों में रुकावटों के योग भी बनेंगे।