14 मई को मदर्स डे है। आप को शहर की कुछ ऐसी महिलाओं से रूबरू करा रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ बेहतर तरीके से घर-बार संभाला है बल्कि पति और पिता के कारोबार में भी मजबूती से हाथ बंटा रहीं हैं। उद्यमिता, स्कूल, कारोबार हो या फिर नौकरी करते हुए ये महिलाओं तमाम चुनौतियों को चुटकियाें में निपटा देती हैं।
सुबह परिवार के लिए नाश्ता बनाने से लेकर खिलाने की जिम्मेदारी को कुशलता के साथ निभाती हैं और इसके बाद अपने कामकाज पर ध्यान फोकस रहता है। प्रस्तुत है चुनौतियों से लोहा लेने और अपने दम पर जीने का माद्दा रखने वाली ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी।
मां की जिम्मेदारी के एहसास से हर सुबह होती है
एकेडमिक ग्लोबल स्कूल की निदेशक करुणा भदानी ने कहा कि मां की जिम्मेदारी के एहसास के साथ प्रतिदिन मेरी सुबह होती है। बेटे को स्कूल भेजने के लिए तैयार करने के साथ नाश्ते का इंतजाम करती हूं। स्कूल भेजने के बाद सुबह 8 बजे तक खुद तैयार होने के साथ पति के ऑफिस जाने की तैयारी करती हूं। यह सब करने के बाद अपने स्कूल के लिए निकल जाती हूं। वहां के सारे प्रबंधन की जिम्मेदारी भी मेरी ही है। दोपहर दो बजे बेटे को स्कूल से लेकर वापस घर आती हूं। परिवार की जिम्मेदारियों में पति संजीव का पूरा साथ निभाती हूं।