फिराक गोरखपुरी के नाम पर बना पुस्कालय।
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बिना लाग-लपेट अपने विचार, एहसास और अनुभव का इजहार शायरी के जरिए प्रस्तुत करके फिराक साहब अदब की दुनिया के फनकार बन गए, लेकिन उनकी याद महफिलों व मुशायरे के मंचों तक ही सिमट कर रह गई है। विडंबना ही है कि गोरखपुर का नाम देश-दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने वाले शायर फिराक साहब की जयंती हो या पुण्यतिथि सिर्फ बातों में ही गुजर जाती है। हुक्मरान से लेकर अफसरान तक किसी को फुरसत नहीं जो उनकी याद में कोई ऐसा भव्य आयोजन करे, जो उनको सच्ची श्रद्धांजलि देने के साथ ही नई पीढ़ी को फिराक साहब के जीवन, संघर्ष और देश के लिए किए गए बलिदान से रूबरू करा सके।