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जनश्रुतियों के अनुसार जमींदार की इच्छा, देवी के अंश पिंड को पूजन अर्चन के लिए नेपाल के पहाड़ों से अपने घर ले जाने की थी। जमींदार परिवार के वंशज ओम प्रकाश पांडेय कहते हैं कि पिंड रूप में माता को एक विशेष डोली में लाया जा रहा था। नेपाल के पहाड़ियों से चलने के क्रम में एक गांव का सीवान पार करने पर एक बकरे की बलि दी जानी थी। लेकिन निचलौल नगर सटे ग्राम टिकुलहियां आने पर बलि के बकरे खत्म हो गए। बकरे के इंतजाम में काफी समय लग गया।