शायर नियाज कपिलवस्तुवी की पंक्तियां 'सबके सुख दुख में जो होता शामिल नहीं, आदमी कहने के भी वो काबिल नहीं, अच्छे कामों से होता बड़ा आदमी, वो बड़े क्या कि जिनमें बड़ा दिल नहीं' सिद्धार्थनगर के रोवापार गांव निवासी 12 वर्षीय विकास पर सटीक बैठती है।
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दिव्यांग शंकर का सहारा बना विकास।
- फोटो : अमर उजाला।
सिद्धार्थनगर शहर से सटे रोवापार गांव निवासी विकास महज 12 साल की उम्र में ही गरीब परिवार से होने के बाद भी दिल का बहुत ही अमीर साबित हो रहा है। लॉकडाउन में अपने परिवार से बिछड़कर सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय की तरफ भटक रहे दिव्यांग शंकर का दर्द देखकर विकास हमदर्द बन गया। विकास के मानवीय पहल की सर्वत्र सराहना हो रही है।
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दिव्यांग शंकर।
- फोटो : अमर उजाला।
दरअसल, लॉकडाउन के दौरान एक दिव्यांग भटक कर सिद्धार्थनगर पहुंच गया। उसने अपना नाम शंकर पुत्र मो. उमर और पता कटरा स्टेशन पुल के नीचे, श्रीनगर मझौवा बताया है। लगभग पंद्रह वर्षीय दोनों पैरों से दिव्यांग बालक बीते तीन माह से स्थानीय नवीन सब्जी मंडी के आसपास परेशान हाल में भटक रहा था। लोग सहानुभूति स्वरूप जब कुछ पैसों से उसकी मदद करते तो कुछ दबंग लोग उसका पैसा छीन लेते थे।
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दिव्यांग शंकर के साथ विकास के पिता राधेश्याम।
- फोटो : अमर उजाला।
शंकर के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को देखकर विकास ने उसके बारे में अपने परिवार में चर्चा की। विकास के पिता राधेश्याम, मां इंद्रावती ने पुत्र की सहृदयता को सलाम करते हुए शंकर को परिवार के साथ रख भी लिया।
दिव्यांग शंकर को साइकिल पर बैठाकर घुमाते विकास व उसकी बहन किरन।
- फोटो : अमर उजाला।
राधेश्याम मजूदरी करके पांच बच्चों की परवरिश करते हैं। इसके बाद भी अनजान चेहरे और दिव्यांग शंकर को परिवार का एक सदस्य मानकर विकास की तरह पालन-पोषण में लगे हुए हैं। विकास और उसकी बहन किरन शंकर को खुश रखने के लिए प्रतिदिन उसे साइकिल पर बैठाकर गांव का भ्रमण कराते हैं।