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गोरखपुर से बढ़ा राम जन्मभूमि आंदोलन, यहीं के जज ने खुलवाया था विवादित स्थल का ताला

Wed, 05 Aug 2020 12:14 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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राम मंदिर आंदोलन में गोरखनाथ मंंदिर की अहम भूमिका रही।(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रसार में गोरखपुर की भूमिका अहम रही है। गोरखनाथ मंदिर ने इसे जन-जन तक पहुंचाने की अगुवाई की। जिस विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन की कमान संभाली, 1989 में इसका कार्यालय गोरखनाथ मंदिर परिसर में ही था। ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ आंदोलन को धार देने में लगे रहे। साल 1986 में विवादित स्थल का ताला खोलने की अनुमति गोरखपुर के ही जज कृष्णमोहन पांडेय ने दी थी।

 
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
जगन्नाथपुर मोहल्ले में रहने वाले जज कृष्णमोहन पांडेय साल 1995 में सेवानिवृत्त हुए। उनके भतीजे सुजीत पांडेय बताते हैं, फैसले के पहले चाचा जी फैजाबाद से आते ही खुद को कमरे में बंद कर लेते थे और चार से पांच घंटे केस से संबंधित अध्ययन करते थे। अध्ययन में पाया कि राम मंदिर में ताला बंद करने का कभी कोई आदेश ही नहीं है। इसी को आधार बनाकर उन्होंने ताला खोलने का आदेश दिया।
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अयोध्या में भूमि पूजन को लेकर भगवा रंग में भगवान राम व हनुमान ध्वज। - फोटो : अमर उजाला।
सुजीत पांडेय कहते है कि मुझे याद है कि चाचाजी ने अपनी मां यानी मेरी दादी से एक दिन रात में कहा कि तुम सो जाओ, महत्वपूर्ण फैसला है, अगर हमको कुछ हो जाए तो चिंता मत करना। सेवानिवृत्त के बाद उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अंतरात्मा की आवाज’ में इस बारे में बहुत विस्तार से लिखा। उनके फैसले को कभी उच्च न्यायालय ने भी खारिज नहीं किया। जिस दिन फैसला दे रहे थे कि कोर्ट के ऊपर एक बंदर आकर बैठ गया था। ऐतिहासिक फैसले के बाद सरकार ने उनका प्रमोशन रोक दिया।
 

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Gorakhnath - फोटो : अमर उजाला।
बीजेपी की ओर से आया था ऑफर, ठुकरा दिया
सुजीत पांडेय बताते हैं, जब आडवाणी जी रथयात्रा निकाल रहे थे, उसमें डीजीपी श्रीचंद दीक्षित और कुछ बड़े अधिकारी शामिल हुए। भाजपा की ओर ऑफर आया कि आप भी शामिल हो जाइए, लेकिन चाचाजी ने ठुकरा दिया। साल 1999 में उनका निधन हो गया।  

जुलूस निकाल रहे 30 बच्चे भी हुए थे गिरफ्तार, कैंट थाने में रखा गया
29 अक्तूबर 1990 को सुबह करीब 11 बजे थे। रामलला वाहिनी के बैनर तले अभिभावकों के संरक्षण में 30 बच्चे (उम्र पांच से 14 वर्ष) गोलघर चौराहे से जुलूस में निकले। मैं भी उनके साथ था। नारा लग रहा था, बच्चा-बच्चा राम का-जन्मभूमि के काम का। सरकार ने आंदोलन पर प्रतिबंध लगा रखा था। पीएससी और सीआरपीएफ के जवान मुस्तैद थे। इंदिरा बाल विहार के पास बच्चों को रोक लिया गया और उन्हें अभिभावकों के साथ गिरफ्तार कर एक बस में बैठा लिया गया। लगभग दो घंटे तक बच्चों को कैंट थाने में रखा गया।
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विहिप का राममंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला
रामलला वाहिनी संयोजक शंकर जोशी ने कहा कि उधर, शहर में यह खबर फैल चुकी थी, माहौल तनावपूर्ण होने लगा। धीरे-धीरे रामभक्तों का जमावड़ा होने लगा तो पुलिस ने बच्चों और अभिभावकों को बस में बैठाकर बेलीपार थाना भेज दिया। भूखे-प्यासे बच्चे दोपहर दो बजे बेलीपार पहुंचे। वहां मजिस्ट्रेट के सामने बच्चों को पेश किया गया, तो मजिस्ट्रेट ने बच्चों की गिरफ्तारी पर क्षोभ प्रकट किया और तत्काल गोरखपुर ले जाने का आदेश दिया। शाम पांच बजे सभी लोग इंदिरा बाल विहार पहुंचे, तब तक शहर में कर्फ्यू लग चुका था। यह मेरे और बच्चों के लिए अविस्मरणीय दिन था। राममंदिर आंदोलन में अपनी भूमिका निभाने वाले बच्चे रितु, श्रद्धा, चुन्नू, अतुल, प्रीति, राधा, रोहितशरण, ज्योति, राहुल, गोपाल गर्व से उस पल को याद करते हैं।    
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विश्व हिंदू परिषद - फोटो : Social Media
मंदिर आंदोलन में परिवार का जुड़ना गर्व की बात
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. बबीता शुक्ला ने कहा कि मेरे लिए गर्व की बात है कि मंदिर आंदोलन में मेरे परिवार ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह संयोग है कि जब मंदिर आंदोलन चरम पर था तब मेरे ससुर डॉ. चक्रपाणि शुक्ला विश्व हिंदू परिषद के महानगर अध्यक्ष थे और अब जबकि मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन होने जा रहा है, मेरे पति डॉ. आरपी शुक्ला के पास विभाग अध्यक्ष का दायित्व है। यही नहीं जब रामलला वाहिनी के जुलूस में शामिल बच्चों को गिरफ्तार किया गया था तो उसमें मेरे घर के भी बच्चे थे। श्रद्धा, अतुल, प्रीति, रोहित व राहुल भी गिरफ्तार हुए थे। मंदिर निर्माण शुरू होने जा रहा है बहुत खुशी है।  
 
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विहिप - फोटो : अमर उजाला
गोरक्षपीठ के तीन साधकों के अभियानों एवं आशीर्वाद का फल
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह बाबरी मस्जिद का ढांचा जब गिरा, उस समय मैं पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर का कुलपति था। विश्व हिंदू परिषद काशी प्राप्त का अध्यक्ष भी था। साल 1989 में गोरखनाथ मंदिर परिसर से ही काम होता था। ढांचा गिराने के तुरंत बाद विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को प्रतिबंधित कर दिया गया था। करीब एक सप्ताह बाद प्रतिबंधित संगठन का अध्यक्ष होने के नाते मुझे भी गिरफ्तार कर लिया गया। थोड़ा पहले चलते हैं, सन 1989 में जब लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा बिहार से गोरखपुर से होकर अयोध्या जानी प्रस्तावित थी। उसी समय बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी हो गई। साल 1989 में मैं गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत था।

 

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विश्व हिंदू परिषद - फोटो : जी पॉल
विहिप के उपाध्यक्ष के रूप में मेरी गिरफ्तारी हुई और बेलीपार थाना में शाम तक बैठाए रखा गया। महानगर के तत्कालीन विधायक शिव प्रताप शुक्ला, मानीराम विधायक ओम प्रकाश पासवान के साथ मुझे एक कार में पुलिस आजमगढ़ ले जाने लगी। तत्कालीन कुलपति प्रो. भूमित्र देव, शिक्षक और विद्यार्थियों के विरोध के फलस्वरूप मुझे छोड़ दिया गया। पांच अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि का भूमिपूजन, श्रीगोरक्षपीठ के तीन साधकों ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरखनाथ मन्दिर के पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ के द्वारा समय-समय पर चलाए गए अभियान, आंदोलन एवं आशीर्वाद द्वारा फलीभूति हो रहा है। एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में मुझे अपार खुशी हो रही है। 
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साध्वी ऋतंभरा - फोटो : अमर उजाला
महज दस मिनट में जुट गई हजारों की भीड़
तत्कालीन विहिप कार्यकारी महानगर अध्यक्ष पुष्पदंत जैन ने बताया कि साध्वी ऋतंभरा की सभा गोरखपुर और बस्ती में होनी थी। प्रशासन ने बैन लगा रखा था। फिर भी उनको गोरखपुर में गोपनीय तरीके से लाकर विशाल सभा कराई गई। हम लोग बस्ती जाने के लिए निकले तो प्रशासन ने खलीलाबाद में जबरदस्ती रोक लिया। जबरदस्त प्रदर्शन किया गया तब जाकर बस्ती पहुंचे। बस्ती में उस समय कर्फ्यू जैसा माहौल था। आनंद गुप्ता ने सभी को एपी डिग्री कॉलेज में पहुंचने के लिए किया। लोगों में मंदिर निर्माण के प्रति ऐसी दीवानगी थी कि महज 10 मिनट के अंदर हजारों लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। जिस मंदिर के लिए हम लोग प्रयासरत रहे अब वह सफल हो रहा है। मन बहुत ही प्रफुल्लित है। 
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