lord buddha
- फोटो : अमर उजाला।
चाइनीज यात्री फाह्यान ने इसे पांचवीं शताब्दी पूर्व का माना था। इस प्रतिमा के मुख को पैरों के पास से देखने पर गंभीर मुद्रा, बीच से देखने पर सामान्य मुद्रा और नजदीक से देखने पर मुस्कुराहट का आभास होता है। प्रतिमा को काफी समय तक लोग स्पर्श करते रहे। जिसके चलते इसका क्षरण शुरू हो गया था। बाद में पुरातत्व विभाग ने इस दुर्लभ प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए चारों तरफ से टफन ग्लास लगा दिया है जिससे अब कोई प्रतिमा को सीधे स्पर्श नहीं कर सकता।