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98 साल पहले इस खास काम के लिए चुना गया था यूपी का ये स्थान, पूरे विश्व में मिली है पहचान

Sat, 13 Feb 2021 12:09 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
दुनिया भर में धार्मिक पुस्तकों के लिए प्रसिद्ध गीता प्रेस से अब तक 70 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। इन पुस्तकों में सर्वाधिक संख्या 15.5 करोड़ श्रीमद्भागवत गीता की है। इसके अलावा रामचरित मानस, हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती, सुंदरकांड की भी संख्या करोड़ों में है।
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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
वर्ष 1921 के आसपास जयदयाल गोयंदका ने कोलकाता में गोविंद भवन ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसी ट्रस्ट के तहत वहीं से वह गीता का प्रकाशन कराते थे। पुस्तक में कोई त्रुटि न हो इसके लिए प्रेस को कई बार संशोधन करना पड़ता था। प्रेस मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है तो अपना प्रेस लगा लीजिए। गोयंदका ने इस कार्य के लिए गोरखपुर को चुना। 1923 में उर्दू बाजार में दस रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया गया और वहीं से शुरू हुआ गीता का प्रकाशन। धीरे-धीरे गीताप्रेस का निर्माण हुआ और इसकी वजह से पूरे विश्व में गोरखपुर को एक अलग पहचान मिली।
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धार्मिक पुस्तक - फोटो : Amar Ujala
अब तक प्रकाशित श्रीमद्भागवत गीता की संख्या
 
हिंदी/संस्कृत 10 करोड़ 80 लाख 51 हजार
अंग्रेजी 36 लाख 93 हजार 650
तेलुगू 83 लाख 39 हजार 500
बांगला 52 लाख 30 हजार 500
मराठी 27 लाख 34 हजार
असमिया 02 लाख 24 हजार 500
तमिल 18 लाख 27 हजार 900
नेपाली 63 हजार
गुजराती 01 करोड़ 12 लाख 28 हजार 500
मलयालम 03 लाख 37 हजार
कन्नड़ 35 लाख 95 हजार
उड़िया 78 लाख 30 हजार 500
पंजाबी 3000
उर्दू 26000

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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
15 भाषाओं में प्रकाशित होती है गीता
गीताप्रेस से गीता का 15 भाषाओं में प्रकाशन होता है। इनमें हिंदी, संस्कृत, बंगला, मराठी, गुजराती, तमिल, कन्नड़, असमिया, उड़िया, उर्दू, तेलगू, मलयालम, पंजाबी, अंग्रेजी, नेपाल भाषाएं हैं।
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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि गीता कोई साधारण पुस्तक नहीं है। यह भगवान की वाणी है। इसलिए सेठजी जयदयाल गोयंदका ने सोचा था कि अधिक से अधिक लोगों तक गीता पहुंचाई जाए। आज भी गीताप्रेस उनकी इसी सोच पर काम करता है। अब तक 15 भाषाओं में 15.5 करोड़ से अधिक श्रीमद्भागवत गीता का प्रकाशन हो चुका है।
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