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गोरखनाथ मंदिर से जुड़ा है भाजपा की जीत का कनेक्शन, यहां से अमित शाह ने बदला था समीकरण

Tue, 03 Mar 2020 10:38 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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बाएं अमित शाह, दाएं बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्पेशल सीरीज का ये सातवां भाग है। पहले छह भाग में आपने पढ़ा कि कैसे योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड स्थित  पैतृक गांव पंचूर से गोरखपुर आए और दीक्षा लेकर संन्यासी बन गए। मां-बाप ने भी बेटे के फैसले के आगे हार मान ली। योगी ने पहली बार गोरखनाथ मंदिर के बाहर निकलकर छात्रों का नेतृत्व किया और पहली बार में ही एसएसपी को फोन कर चेतावनी दे डाली। छोटी उम्र में ही योगी नायक बन गए थे। वहीं गोरखपुर मंदिर के भंडारे में योगी ने ऐसा सबक सीखा, जिसे वह जीवन में कभी नहीं भूले। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इन्हें हिन्दुत्व का पोस्टर बॉय बना दिया। अब आगे पढ़ें...
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बाबा गोरखनाथ का दर्शन करते अमित शाह। (File) - फोटो : अमर उजाला।
7 जुलाई 2013 को अयोध्या में रामलला का दर्शन करने के बाद अमित शाह गोरखपुर मंदिर पहुंचे थे। यहां पहुंचते ही वे महंत अवेद्यनाथ को देखने पहुंचे, क्योंकि वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उस समय उनकी उम्र 94 साल हो चुकी थी। शाह के लिए यह करीब तीन दशक बाद पुनर्मिलन जैसा था।

 
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बाबा अवैद्यनाथ का दर्शन करते अमित शाह। (File) - फोटो : अमर उजाला।
80 के दशक में महंत अवैद्यनाथ श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के प्रमुख के तौर पर पूरे देश में भ्रमण कर रहे थे, इस दौरान वे अहमदाबाद भी गए थे। उस समय शाह ने अखिल भारतीय विद्यार्थी के स्वयंसेवक के रुप में महंत की सेवा की थी। उसी समय से अमित शाह का गोरखनाथ मंदिर से एक विशेष नाता जुड़ गया था।

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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
गुजरात के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह ने 19 मई 2013 को उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रभारी बनाए जाने के बाद राज्य में पार्टी का काम संभालने में थोड़ा वक्त लिया। यह वो समय था जब भाजपा 13 साल के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी। यहां अमित शाह गोरखनाथ मंदिर में बाबा का आशीर्वाद लेकर भाजपा को विजयी रथ पर सवार कर दिया था।
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बाएं सीएम योगी, बीच में गृहमंत्री अमित शाह और दाएं सांसद रवि किशन। - फोटो : अमर उजाला।
इसके बाद पूरे देश को पता है कि अमित शाह ने यूपी की 80 लोकसभा सीट में से 73 सीट पर अपने सहयोगी दल के साथ जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में तो सपा पांच और कांग्रेस 2 सीट ही जीत पाई थी। वहीं बसपा का तो खाता भी नहीं खुल पाया था।

साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।  

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