जिसको बोध हो गया वह किसी का विरोध नहीं करता। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में मनुष्य और देवताओं के साथ असुरों की भी वंदना की है। रामचरित मानस भी ठाकुर जी का वांग्मयी अवतार है। इसमें आठ जगहों पर निर्बाण (निर्वाण) की चर्चा है। निर्वाण केवल अवतार का होता है, जबकि मोक्ष मनुष्यों को मिलता है। भगवान परशुराम, राम, कृष्ण और बुद्घ ने निर्वाण प्राप्त किया था इसलिए वे पुन: धरती पर आ सकते हैं। कुशीनगर की रामकथा मानस निर्वाण की कथा होगी। ये बातें कुशीनगर में आयोजित रामकथा के उदघाटन सत्र में कथा वाचक मोरारी बापू ने कहीं।
विज्ञापन
2 of 5
कुशीनगर में रामकथा की शुरुआत।
- फोटो : अमर उजाला।
पहले दिन रामचरित मानस के विषय में चर्चा करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि यह सात सोपाल का ग्रंथ है। गोस्वामी जी ने श्लोक को लोक तक पहुंचाने के लिए इसकी रचना की थी। वर्ण व्यवस्था की चर्चा करते हुए कहा कि इसका जिक्र तो श्रीमद्भागवत कथा में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी किया है लेकिन यह व्यवस्था अस्पृश्यता पर आधारित नहीं बल्कि कर्म पर आधारित है। ब्राह्मण समाज में फैली बुराइयों को अपने ज्ञान से दूर करता है, क्षत्रिय सभी की रक्षा करता है, वैश्य धन कमाकर व्यवस्था का संचालन करता है और शुद्र तो सबसे बड़ा है जो सबकी सेवा करता है।
विज्ञापन
3 of 5
कुशीनगर में रामकथा की शुरुआत।
- फोटो : अमर उजाला।
पूजन विधियों की चर्चा करते हुए कहा कि मानस में गोस्वामी जी ने जिन पांच प्रमुख तत्वों का उल्लेख किया है, उसमें विवेक प्रधान है। जो व्यक्ति सही-गलत का भेदभाव समझ लेता है वह गणेश वंदना कर लेता है। जो अंधकार से निकलकर प्रकाश में रहने सीख लेता है वह सूर्य की पूजा कर लेता है। हृदय की उदारता ही विष्णु पूजा है। इसी तरह से देवी दुर्गा श्रद्घा की प्रतीक हैं और जो व्यक्ति श्रद्घा भाव से अपने कर्म को करता है वह दुर्गा पूजा कर लेता है। कुशीनगर में रामकथा के महत्व को रेखांकित करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि वे इससे पहले सारनाथ व बोधगया में रामकथा सुना चुके हैं। भगवान बुद्घ की मोक्ष की धरती कुशीनगर और जन्म धरती कपिलवस्तु में भी रामकथा सुनाने की इच्छा थी, जिसमें से कुशीनगर में भी रामकथा की शुरूआत हो गई है। यहां होने वाली कथा को श्मानस निर्वाण नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि मोक्ष जीवन-मरण से मुक्ति देता है जबकि स्वर्ग जाने वाले को दोबारा जन्म लेना ही पड़ता है। परंतु जिसे निर्वाण मिलता है वह पुन: पृथ्वी पर अवतार लेता है।
4 of 5
कुशीनगर में रामकथा की शुरुआत।
- फोटो : अमर उजाला।
राम मंदिर के लिए दान जरूरी
कथा के दौरान मोरारी बापू ने राममंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ा सुंदर कार्य हो रहा है। इसके लिए चंदा जुटाना भी अच्छा है। हर व्यक्ति को खुलकर दान करना चाहिए। राष्ट्रपति ने अपने वेतन से दान देकर जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान करना चाहिए। जो दान नहीं कर सकते हैं वे भी अगर पवित्र भाव रखते हैं तो भी साधुवाद के पात्र हैं।
कोरोना से बचाव जरूरी
अपने भक्तों को कोरोना से बचाव की नसीहत देते हुए कहा कि कथा वाचक ने कहा कि कोविड गाइड लाइन का पालन हमारे शुभ के लिए हो रहा है। अपने देश की बनी दवाई को दुनिया भर में पहचान मिल रही है। परंतु जब तक बीमारी पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो जाता, तब तक लापरवाही न बरतें। इतनी जल्दी दवाई खोज लेने के लिए देश के सभी वैज्ञानिक व प्रधानमंत्री भी बधाई के पात्र हैं।