आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के संवाद सुनते छात्र- छात्राएं।।
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षा के उपार्जन का उद्देश्य धनार्जन नहीं
सरसंघचालक ने विद्यार्थियों ने सीधा संवाद भी किया और कहा कि ज्ञान उपार्जन का उद्देश्य धनार्जन नहीं होना चाहिए। विद्या उपार्जन का मतलब त्याग है। भारत ज्ञान विज्ञान युक्त सकारात्मक चिंतन करने वाला देश है। यदि आपके पास विद्या, धन और ताकत है तो उसका इस्तेमाल देश, समाज के विकास में करें।
भारत भक्ति, ज्ञान की उपासना का देश है। भारत ने अपने वैभव का इस्तेमाल दुनिया की भलाई के लिए किया है। अच्छा देश श्रम से बनता है। किसान कर्मशील होते हैं, तभी खेतों में हरियाली दिखती है। आप सतत कर्मशील बने रहें, ऐसा प्रयास करें। गरीब, वंचित की सेवा सबसे बड़ा कर्तव्य है।