राम प्रसाद बिस्मिल के अंतिम शब्द।
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बिस्मिल बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कुल 11 पुस्तकें लिखी थीं। वे इन पुस्तकों को स्टॉल लगाकर खुद भी बेचते थे। उनकी पुस्तकों में स्वाधीनता का अंश होता था। यही कारण है कि उनकी पुस्तकों को लोग ज्यादा पसंद करते थे। बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि उन्होंने क्रांतिकारी बनने के बाद पहला तमंचा अपनी किताब की बिक्री से मिली राशि से ही खरीदा था। बिस्मिल के जीवन को नई पीढ़ी तक ले जाने की कोशिशों में जुटे गुरुकृपा संस्थान के बृजेश त्रिपाठी कहते हैं, बिस्मिल एक रचनाकार, कवि और साहित्यकार भी थे।