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प्रिया हत्याकांड: बिखर गए तीन परिवार... बड़ों की करतूत की सजा भोगेंगे बच्चे; चार बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय

Tue, 03 Feb 2026 03:24 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

गोरखपुर के पीपीगंज में प्रिया हत्याकांड के बाद तीन परिवार बिखर गए हैं। प्रिया के बेटे के सिर से मां का साया छीन गया। जबकि आरोपी दंपती के बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय है। विजय और संध्या के तीन बच्चे हैं। 
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मृतक प्रिया शेट्ठी की फाइल फोटो और आरोपी युवक - फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया
गोरखपुर के पीपीगंज में प्रिया हत्याकांड से तीन परिवार बिखर गए। बड़ों की करतूत की वजह से जहां एक तरफ मुंबई में बेटे के सिर से मां का साया उठ गया, वहीं जेल भेजे गए दंपती के तीन बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय हो गया है। आरोपी रामबिलास के परिवार में भी चिंता छा गई है।

इस हत्याकांड ने न केवल प्रिया के परिवार, बल्कि हत्यारोपियों विजय और संध्या के घर (ससुराल-मायके) को भी तहस-नहस कर दिया। विजय और संध्या के तीन बच्चे हैं। दो बेटियां और एक बेटा। शहर आने से पहले उन्होंने एक बेटी और दो साल के बेटे को बड़े भाई के घर मुंबई में छोड़ दिया था। बड़ी बेटी को प्रिया के साथ लेकर गोरखपुर आए।
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आरोपी पत्नी और पति - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वारदात के बाद बड़ी बेटी अपनी नानी के पास है। इस घटना ने उनके परिवार की भावनात्मक स्थिति पूरी तरह से बदल दी। उधर, हत्यारोपी रामबिलास की छोटी बेटी और इकलौते बेटे के रिश्तों की चर्चा चल रही थी। छोटी बेटी पीपीगंज में एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। 

 
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प्रिया की फाइल फोटो - फोटो : इंस्टाग्राम
परिवार की पूरी आर्थिक स्थिति पेंशन पर निर्भर थी। रामबिलास के जेल जाने के बाद स्थिति और भी दयनीय होने की आशंका है। रामबिलास की पत्नी अब बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। रामबिलास के जेल जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ेगी, वहीं बच्चों की शादी को लेकर भी चिंता सता रही है।

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रिया हत्याकांड का खुलासा
मुंबई के वडाला निवासी प्रिया शेट्ठी (35) हत्याकांड का गोरखपुर पुलिस ने सोमवार को पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मामले में मुंबई में रहने वाले प्रेमी विजय, उसकी पत्नी संध्या और ससुर रामबिलास को गिरफ्तार कर लिया। मुंबई निवासी प्रिया शेट्टी की हत्या उसके लिव-इन पार्टनर और उसकी पत्नी ने पीछा छुड़ाने के लिए की थी। शव की पहचान छिपाने के लिए चेहरा ईंट से कूच दिया था। इसके बाद उसे निर्वस्त्र करके झाड़ियों में फेंक दिया। 
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गोरखपुर में झाड़ियों में मिला था निर्वस्त्र शव, जांच करती टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस जांच के अनुसार, सहजनवां थाना क्षेत्र के मारड़ पाली गांव का निवासी विजय मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता था। वहां उसकी मुलाकात प्रिया नामक युवती से हुई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध बने। दोनों लिव इन में भी रहने लगे। 
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी संध्या - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रिया घर ले चलने का दबाव बनाने लगी तब विजय उसे छोड़कर मुंबई से भाग आया था। यहां आने पर कुछ दिन तक बातचीत करता रहा। प्रेमी को पीछा छुड़ाता देख प्रिया उसकी तलाश करते हुए पीपीगंज पहुंच गई थी। यहां आने के बाद उसे पता चला कि विजय शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। आरोप है कि घर में कलह बढ़ने पर विजय और उसकी पत्नी संध्या ने मिलकर प्रिया की हत्या की साजिश रची।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी विजय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हत्या कर पहचान छिपाने के लिए सिर मुंडवाया...पकड़ा गया
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने प्रिया की हत्या के बाद अपनी पहचान छिपाने के लिए सिर के बाल मुंडवा लिए थे। साथ ही दाढ़ी-मूंछ भी कटवा दी थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से हत्या में प्रयुक्त स्कूटी, प्रिया की जैकेट, उसका आधार कार्ड और पैनकार्ड बरामद किया है।

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प्रिया की फाइल फोटो - फोटो : इंस्टाग्राम
एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र प्रसाद और एसपी साउथ दिनेश पुरी ने बताया कि आरोपियों की पहचान (महाराष्ट्र) के चारको कांदिवली वेस्ट मुंबई निवासी विजय कुमार साहनी, उसकी पत्नी संध्या साहनी और ससुर पीपीगंज के तिघरा टोला सपहिया निवासी रामबिलास के रूप में हुई है। आरोपी विजय मूलरूप से सहजनवां के माडर पोस्ट पाली का रहने वाला है।

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गोरखपुर में झाड़ियों में मिला था निर्वस्त्र शव, जांच करती टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
30 जनवरी को पीपीगंज के बरघट्टा पुल के नीचे प्रिया का निवस्त्र शव मिला था। प्रिया के चेहरे पर ईंट से कई वार किए गए थे ताकि उसकी पहचान न हो सके। इसके बाद सीसीटीवी और सर्विलांस की मदद से आरोपियों की तलाश शुरू की गई। पुलिस की एक टीम महिला की शिनाख्त में जुट गई। जबकि दूसरी टीम घटना वाली रात की सीसीटीवी की छानबीन में जुटी। इसमें एक स्कूटी पर तीन लोग जाते दिखे। संदिग्ध मानकर पुलिस ने उनके बारे में जानकारी जुटाई।

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प्रिया की फाइल फोटो - फोटो : इंस्टाग्राम
स्कूटी को ट्रेस करते हुए पुलिस विजय के ससुर रामबिलास तक पहुंच गई। वहां पूछताछ के दौरान ससुर ने अपनी स्कूटी दामाद विजय को देने की बात कही। पुलिस ने जब विजय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो सामने आया कि इस हत्या में विजय की पत्नी भी शामिल थी।

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी संध्या - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि विजय ने प्रिया को गला घोंटकर मार डाला था। उसे पता था कि लाश फेंकने की जगह से उसके घर के रास्ते में कई सीसीटीवी लगे हैं। इससे वह आसानी से पहचान लिया जाएगा। इसलिए उसने सिर के बाल, दाढ़ी-मूंछ कटवा दिए। उसकी पत्नी ने कपड़े नदी में फेंक दिए लेकिन ये दांवपेंच काम नहीं आए। पुलिस को विजय सीसीटीवी में दिख गया। उसने हत्या के वक्त अपने ससुर रामबिलास की स्कूटी का इस्तेमाल किया था। इसलिए पुलिस ने ससुर को भी आरोपी बनाया है।

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वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह घटना समाज के टूटते मूल्यों की परिचायक
घटनाएं केवल अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक संक्रमण का परिणाम है। महानगरों में बने संबंध पारंपरिक सामाजिक नियंत्रण से बाहर होते हैं, जबकि कस्बाई समाज में विवाह अब भी पुरुष-सत्ता और प्रतिष्ठा से जुड़ा है। जब झूठ, छल और दोहरी जिंगदी का दबाव असहनीय हुआ तो समाधान के रूप में संवाद या कानूनी रास्ते नहीं, बल्कि हिंसा को चुना गया। इस प्रक्रिया में व्यक्ति अपने आंतरिक संघर्षों और असुरक्षाओं को समझने के बजाय उन्हें दबाने या नष्ट करने की कोशिश करता है। परिणामस्वरूप प्रेम, विश्वास और सहमति जैसे मूल्य पीछे छूट जाते हैं और सत्ता, स्वामित्व व नियंत्रण हावी हो जाती हैं। यह हमारे समाज में भावनात्मक परिपक्वता, लैंगिक संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षरण का खतरनाक संकेत है।- डॉ. मनीष पांडेय, समाजशास्त्र विभाग, दी.द.उ. गोरखपुर विश्वविद्यालय

 
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गोरखपुर में झाड़ियों में मिला था निर्वस्त्र शव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसी घटनाएं अक्सर गुस्सा, जलन या मानसिक तनाव के कारण होती हैं। यह केवल कानूनी या पुलिस जांच का मामला नहीं है, बल्कि अपराधियों की मानसिक प्रोफाइल समझना भी जरूरी है। समाज में घरेलू और व्यक्तिगत विवाद को गंभीरता से नहीं लेने से हिंसा बढ़ती है। इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान, तनाव प्रबंधन और गुस्से के नियंत्रण की शिक्षा जरूरी है। परिवार और समाज की जागरूकता से ही ऐसे मामलों में कमी लाई जा सकती है।- डॉ. आकृति पांडेय, मनोवैज्ञानिक
 
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