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22 रिमांडर के बाद भी बाहुबली पूर्व मंत्री का बयान लेने का साहस नहीं जुटा पा रही पुलिस

Sun, 05 Jan 2020 10:53 AM IST
विजय जैन शिवम सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर
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crime360 - फोटो : अमर उजाला
आला अधिकारी 22 रिमाइंडर दे चुके हैं, फिर भी  पूर्व कैबिनेट मंत्री और पूर्वांचल के बाहुबली हरिशंकर तिवारी के घर ‘तिवारी हाता’ पर पुलिस के छापे के बाद बैठाई गई जांच दो साल से पेंडिंग है।

दरअसल, मातहत पुलिस अधिकारी आरोपितों से बयान लेने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के महज एक माह बाद 22 अप्रैल 2017 को आनन-फानन में की गई गोरखपुर पुलिस की यह कार्रवाई अब उसके ही हलक की फांस बन गई है।
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- फोटो : अमर उजाला
उस वक्त पूर्वांचल का पारा अचानक चढ़ गया था। बम..बम शंकर... जय हरिशंकर के नारे से गूंज उठा था आधा शहर। हम बात कर रहे है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री व बाहुबली हरिशंकर तिवारी के घर छापेमारी का। उस तिवारीहाता में पुलिस अब नहीं जाना चाहती है, ना ही किसी से संपर्क करने की ही कोशिश करती है। पुलिस की मजबूरी कहें या 82 साल की उम्र में भी हरिशंकर तिवारी की हनक कि जांच कब और कैसे पूरी होगी इस पर भी अफसर बोलने से बचते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
तब गोरखपुर में आईपीएस हेमराज मीणा एसपी सिटी हुआ करता थे। खोराबार के जगदीशपुर में मार्च 2017 में रिलायंस पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से 98 लाख रुपये की लूट हुई थी। एसपी सिटी ने इस मामले में बलिया के छोटू चौबे को रिमांड पर लिया था। पुलिस ने छोटू चौबे से पूछताछ की और बताया कि लूट में सोनू पाठक नाम का व्यक्ति भी शामिल है। पुलिस का कहना था कि उसकी लोकेशन पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के घर पर मिली है।

इसी आधार पर एसपी सिटी हेमराज मीणा की अगुवाई में पांच थानों की पुलिस ने बसपा सरकार के पूर्व मंत्री के घर छापा मारा था। करीब 30 मिनट तक छानबीन की और छह लोगों को हिरासत में लेकर निकल गए। इन सबसे थाने में पूछताछ हुई, मगर बाद में एक शख्स अशोक सिंह को ही अवैध असलहा रखने के आरोप में जेल भेजा गया।

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crime360 - फोटो : अमर उजाला
तब बुजुर्ग हरिशंकर तिवारी की अगुवाई में निकल पड़ा था हुजूम
पुलिस ने जब छापेमारी की कार्रवाई की थी तो बसपा से हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी विधायक हो चुके थे। उन्होंने पुलिस से सर्च वारंट भी मांगा था, मगर पुलिस के पास कोई कागजात नहीं थे। यही वजह थी कि पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा था। पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय भी वहीं रहते हैं। इसे तिवारी परिवार ने मुद्दा बनाया। पूर्व मंत्री, पूर्व सभापति और वर्तमान विधायक के आवास पर बिना सर्च वारंट के छापे के विरोध में 24 अप्रैल 2017 को बुजुर्ग हो चुके हरिशंकर तिवारी सड़क पर निकल पड़े।
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- फोटो : अमर उजाला
तिवारीहाता से जब हरिशंकर तिवारी निकले थे देखते ही देखते उनके पीछे पूरा हुजूम चल पड़ा। एक बार सड़कों पर फिर से हरिशंकर तिवारी का दबदबा देखा गया। उन्हें रोकने के लिए कलेक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए गए थे। कई थाने की फोर्स लगाई गई। फिर गुहार लगाई गई। हरिशंकर तिवारी ने भी नियमों का पालन किया और शांति से कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए एक ज्ञापन भी दिया गया था।
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