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- फोटो : अमर उजाला।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने दिवाली से पहले और बाद में औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रदूषण की जो रिपोर्ट तैयार की है, वह चौंकने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक पटाखों से वातावरण में रेस्पिरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम) और सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) की मात्रा डेढ़ गुना बढ़ जाती है। नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा भी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के स्तर तक पहुंच जाती है। इससे दम घुटता है। घर के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। यह शरीर के सभी हिस्सों को प्रभावित करता है। सांस के साथ ही आंख, कान के मरीज भी बढ़ जाते हैं।