फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना संकट: कहीं हादसे का सबब न बन जाए ऑक्सीजन प्लांट पर लग रही भीड़, इन नियमों की भूलकर भी न करें अनदेखी

Fri, 07 May 2021 07:33 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज नेटवर्क, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 6
गोरखपुर ऑक्सीजन प्लांट। - फोटो : अमर उजाला।
ऑक्सीजन प्लांट के प्लेटफॉर्म के पास तक पहुंचने वाली लोगों की भीड़, कहीं हादसे का सबब न बन जाए। प्लांट विस्फोटक नियमावली के अनुसार ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लेटफॉर्म एक प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। वहां ऑपरेटर के सिवाय किसी अन्य को जाने की अनुमति नहीं होती है, लेकिन इन दिनों गीडा के दोनों रिफिलिंग प्लांट के प्लेटफॉर्म तक लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
विज्ञापन

2 of 6
ऑक्सीजन प्लांट में हुआ ब्लास्ट।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
बुधवार को लखनऊ के चिनहट इलाके में देवा रोड पर स्थित केटी वेल्डिंग स्टोर ऑक्सीजन लिक्विड प्लांट में विस्फोट हो गया। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में दो कर्मचारियों के अलावा एक आम नागरिक भी शामिल था। वहीं जो लोग जख्मी हुए हैं वे सभी वहां ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने के लिए आए हुए थे। ये सभी रिफिलिंग प्लेटफॉर्म के पास खड़े थे और एक गैस सिलिंडर रिफिलिंग के दौरान फट जाने से यह हादसा हो गया। गोरखपुर के ऑक्सीजन प्लांटों पर भी लोगों की ऐसी ही भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में ऑपरेटर के सामने जल्दी-जल्दी सिलिंडर रिफिलिंग का दबाव बना रहता है। नतीजतन कई बार मानकों के उल्लंघन का अंदेशा भी बना रहता है।
विज्ञापन

3 of 6
ऑक्सीजन प्लांट। - फोटो : ANI
सिलिंडरों की हीटिंग की लगातार टेस्टिंग जरूरी
दरअसल एक बार में 30 से 40 सिलिंडरों की रिफिलिंग होती है। ऑपरेटर हीट मशीन के जरिए क्रमवार सिलिंडरों की हीटिंग चेक करते रहते हैं। जो भी सिलिंडर मानक से ज्यादा गर्म हो जाता है, उसे तत्काल बाहर निकालकर रिजेक्ट लिखकर अलग कर दिया जाता है। इसके लिए जरूरी है कि ऑपरेटर का सारा ध्यान इस पर बना रहे। इसीलिए ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लेटफॉर्म प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। लेकिन, इन दिनों लोग अपने ऑक्सीजन गैस सिलिंडर जल्द से जल्द पाने के लिए प्लेटफॉर्म के बिल्कुल करीब खड़े रहते हैं और ऑपरेटर पर लगातार दबाव बनाए हुए रखते हैं।

4 of 6
ऑक्सीजन संयंत्र - फोटो : अमर उजाला
ऑक्सीजन और ग्रीस के संपर्क से लग सकती है आग
ऑक्सीजन गैस की रिफिलिंग को विस्फोटक की श्रेणी में रखा गया है। इसकी वजह यह भी है कि ऑक्सीजन गैस और ग्रीस के संपर्क से सेकेंड में आग लग सकती है, जिसकी वजह से कभी भी हादसा हो सकता है।
विज्ञापन

5 of 6
ऑक्सीजन सिलिंडर - फोटो : अमर उजाला
हरेक पांच साल पर सिलिंडर की टेस्टिंग जरूरी
नियमानुसार हरेक पांच साल पर ऑक्सीजन सिलिंडर की टेस्टिंग जरूरी होती है। सरकार द्वारा निर्धारित एजेंसी के जरिए टेस्टिंग के बाद सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। दरअसल सिलिंडर की टेस्टिंग इस वजह से जरूरी होती है कि कहीं वह अंदर से चोक तो नहीं हो गया है। चोक रहने पर जब प्रेशर से सिलिंडर में गैस भरा जाता है तो वह विस्फोट के साथ फट सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
आरके ऑक्सीजन के निदेशक अजय जायसवाल ने बताया कि ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लेटफॉर्म पर ऑपरेटर के अलावा किसी अन्य का जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। लेकिन, इन दिनों प्लेटफॉर्म तक लोगों की काफी भीड़ हो जा रही है। लोगों से लगातार प्लेटफॉर्म से दूर रहने की अपील की जाती रहती है, क्योंकि लोगों की भीड़ की वजह से ऑपरेटर का ध्यान बंटता है। शासन को भी इसके लिए अपनी ओर से कोई व्यवस्था बनानी चाहिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें