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Corona: गोरखपुर में एक सप्ताह के अंदर मिले 254 मरीज, एक पॉजिटिव आठ से नौ लोगों को कर रहा संक्रमित

Fri, 07 Jan 2022 08:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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कोरोना जांच के लिए सैंपल लेते कर्मी। - फोटो : अमर उजाला
पहली और दूसरी लहर की तुलना में इस बार कोरोना संक्रमण का असर तीन गुना अधिक है। एक मरीज आठ से नौ लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि 80 से 85 प्रतिशत मरीज अब तक कांटेक्ट ट्रेसिंग की वजह से संक्रमण का शिकार हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग संक्रमण को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जबकि इस बार वायरस तीन से चार मिनट के अंदर ही शरीर में प्रवेश कर जा रहा है। इसकी वजह से लोग ज्यादा तेजी से संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि इस बार संक्रमण की रफ्तार पहली और दूसरी लहर की तुलना में तीन गुना अधिक है। इस बार वायरस के चिपकने की क्षमता ज्यादा है।

 
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कोरोना वायरस की जांच कराते लोग - फोटो : अमर उजाला
म्युटेशन की वजह से वायरस तेजी से शरीर में चिपक रहा है। इसे साइंस की भाषा में वायरस अधेरेंस कहते हैं। इस प्रक्रिया में वायरस के जीन में बदलाव हो जाता है, जो ज्यादा खतरनाक साबित होता है। इसकी वजह से तीन से चार मिनट के अंदर वायरस लोगों को संक्रमित कर दे रहा है। ऐसे में इस बार ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।

 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
गोरखपुर जिले में एक जनवरी को कोरोना का एक्टिव केस छह था। इसके अगले दिन एक्टिव केस का आंकड़ा 10 पहुंच गया है। तीन जनवरी को छह माह बाद सात केस मिले। चार जनवरी को यह आंकड़ा दहाई तक पहुंच गया है। एक्टिव केस की संख्या 39 पहुंच गई। पांच जनवरी को एक साथ 52 केस मिले। इसके अगले दिन 57 कोरोना संक्रमित केस मिले तो एक्टिव केस की संख्या 148 पहुंच गई।

 

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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
यह आंकड़ा यही नहीं रूका महज 24 घंटे के अंदर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 100 पार पहुंच गई। सात जनवरी को एक साथ 106 केस मिले हैं। जबकि पहली और दूसरी लहर में एक सप्ताह तक केवल 10 से 20 केस मिल रहे थे। उस वक्त भी मरीजों में हल्के लक्षण थे। लेकिन, इस बार केसों के मिलने का सिलसिला बड़ा तेज है।

 
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डॉ. अमरेश सिंह - फोटो : अमर उजाला।

हल्के में न संक्रमण को, गंभीरता कभी भी बढ़ सकती है

डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि अभी लोग संक्रमण को बेहद हल्कें में ले रहे हैं। पहली और दूसरी लहर की शुरुआती दौर में भी यही हाल था। लेकिन अचानक संक्रमण की दर जब बढ़ी तो अचानक मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया है। अमेरिका में भी इस तरह से संक्रमण की स्थिति थी। अचानक गंभीरता बढ़ी तो बेड मिलना मुश्किल हो गए। ऐसे में इस बार भी संक्रमण को हल्के में न लें। गंभीरता कभी बढ़ सकती है। इसलिए एहतियात ज्यादा बरते।
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