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'कागज' फिल्म में चमकेगी खलीलाबाद तहसील, पंकज त्रिपाठी निभा रहे इसका मुख्य किरदार, तस्वीरें

Thu, 31 Dec 2020 09:33 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
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खलीलाबाद तहसील की पुरानी बिल्डिंग, इनसेट में अभिनेता पंकज त्रिपाठी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी की फिल्म ‘कागज’ का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज किया गया। यू-ट्यूब पर फिल्म के ट्रेलर में खलीलाबाद तहसील की बिल्डिंग को देखकर स्थानीय लोगों में उत्सुकता है, लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि इस फिल्म की शूटिंग खलीलाबाद तहसील में हुई ही नहीं है।
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पंकज त्रिपाठी और सतीश कौशिक। - फोटो : Instagram
सलमान खान फिल्म के बैनर तले बन रही फिल्म कागज का निर्देशन सतीश कौशिक कर रहे हैं। फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। ‘कागज’ के ट्रेलर में पंकज का किरदार ‘भरत लाल मृतक’ शादी में बैंड बजाता है, जो सरकारी कागजों में मर चुका है। अब वह कोशिश कर रहा है कि किसी तरह उसका जीवित प्रमाण पत्र बन जाए।


 
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : Instagram
फिल्म ‘कागज’ आजमगढ़ के भरत लाल उर्फ लाल बिहारी के जीवन पर आधारित है। यू-ट्यूब पर फिल्म का ट्रेलर 45 लाख लोग देख चुके हैं। ट्रेलर में 1:11वें  मिनट पर खलीलाबाद तहसील का दृश्य देखकर स्थानीय लोग भौचक रह गए। हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर शहर के मध्य में स्थित पुरानी तहसील भवन में कब शूटिंग हुई। खलीलाबाद तहसील का नाता ‘कागज’ फिल्म में किस प्रकार जुड़ा है, यह तो फिल्म रिलीज होने पर पता चलेगा।

 

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पंकज त्रिपाठी - फोटो : Instagram
‘कागज’ सात जनवरी को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी। पहले यह फिल्म मई में रिलीज होनी थी, लेकिन कोविड-19 के कारण सिनेमाघर बंद हो गए और शूटिंग पर रोक लग गई थी। अब फिल्म को ऑनलाइन रिलीज किया जाएगा। फिल्म के राइटर सतीश कौशिक हैं, इसलिए सिस्टम पर तीखी और तल्ख शैली वाली फिल्म हो सकती है। उम्मीद है कि ‘कागज’ में भरत लाल का किरदार निभाने वाले पंकज त्रिपाठी अभिनय की नई इबारत लिखेंगे।

 
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कौन है भरत लाल उर्फ लाल बिहारी
किसी अनाम शायर का शेर है- हंसना रोना आहें भरना, सब कागज पर चलता है, इस दुनिया में जीना-मरना अब कागज पर चलता है। सरकारी नियमों के कारण आदमी का वजूद महज कागजों में सिमट कर रह गया है। आजमगढ़ के भरत लाल उर्फ लाल बिहारी के साथ कागजों का अजब-गजब खेल खेला गया। उसकी जमीन हड़पने के लिए रिश्तेदारों ने अफसरों से मिलीभगत कर उसे सरकारी कागजों में मृत घोषित करवा दिया। लाल बिहारी को 1975 से 1994 तक खुद को जिंदा साबित करने के लिए तरह-तरह के पापड़ बेलने पड़े। लाल बिहारी 19 साल तक मृतक सिंह के तौर पर सुर्खियाें में रहा।

 
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डीएम दिव्या मित्तल। - फोटो : अमर उजाला।
खलीलाबाद तहसीलदार शशांक शेखर राय ने कहा कि जुलाई-2018 से खलीलाबाद में तहसीलदार के पद पर तैनाती है, लेकिन कागज फिल्म की शूटिंग तहसील में हुई है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। न ही फिल्म की शूटिंग की कोई अनुमति प्रशासन से लेने की जानकारी है। यह भी हो सकता है कि बगैर प्रशासन के संज्ञान में लाए ही गुपचुप तरीके से फिल्म की शूटिंग की गई हो।

डीएम दिव्या मित्तल कागज फिल्म की शूटिंग खलीलाबाद तहसील भवन में हुई है अथवा नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। वैसे प्रशासन की ओर से इस फिल्म की शूटिंग की अनुमति नहीं ली गई है। तहसीलदार ने भी ऐसी किसी फिल्म की शूटिंग नहीं होने की जानकारी दी है।
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