देश को झकझोर कर रख देने वाले दिल्ली के निर्भया कांड के दोषियों का डेथ वारंट तो जारी हो गया, मगर गोरखपुर में महिला अपराध से जुड़े 4885 मामलों में पीड़िताओं को अब भी इंसाफ का इंतजार है। महिला अपराध से जुड़े ये सभी मामले निचली अदालतों में ही लंबित हैं। इन सभी मामलों में कोर्ट में साक्ष्यों का सत्यापन जारी है।
ज्यादातर मामलों में पुलिस द्वारा जांच में देरी ही सामने आती है। ऐसे कई मामले हैं, जिसमें पुलिस की ओर से चार्जशीट समय से नहीं दाखिल की गई तो कई पर आरोप-प्रत्यारोप होने की वजह से जांच, साक्ष्य संकलन में देरी होती है। उधर, जिन मामलों में पुलिस तेजी दिखाती है, उसमें सजा भी हो जाती है।
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निर्भया के दोषी
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, घरेलू हिंसा, दहेज हत्या जैसे 4885 केस न्यायालयों में लंबित पड़े हैं। इनमें से दुष्कर्म पीड़िताओं की भी यही सोच होती है कि दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि उन्हें इंसाफ मिल सके। मगर कहीं ना कहीं व्यवस्था की लापरवाही से मामले लटके रहते हैं, फिर पीड़िताओं को इंसाफ के लिए इंतजार करना पड़ता है।
वैसे इसमें सभी मामले पुराने ही नहीं है, कई ऐसे भी मामले हैं, जो हाल हाल के हैं। पुलिस की ओर से अब ऐसे गंभीर मामलों को निपटाने के लिए ही मानीटरिंग सेल बनाया गया है। अफसर निगरानी कर रहे हैं तो इसका कुछ असर भी सामने आया है।
पुलिस ने जिन मामलों में तेजी दिखाई और जांच मजबूत साक्ष्यों के साथ कोर्ट में पेश की उनमें सश्रम कारावास, आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई गई है। अभी हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें महिला अपराध से जुड़े मामलों में सजा सुनाई गई है।
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nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
इन मामलों की सही पैरवी तो मिली सजा
अपराध संख्या 37/14 : झंगहा में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी आय्यूब को आजीवन कारावास की सजा हुई।
अपराध संख्या 441/15: चौरीचौरा में दुष्कर्म, धोखाधड़ी के दोषी राकेश मणि तिवारी को सश्रम कारावास व आर्थिक दंड की सजा हुई।
अपराध संख्या 236/13 : चिलुआताल में दहेज हत्या के दोषी रामवृक्ष, बृजेश को कारावास व अर्थदंड की सजा।
अपराध संख्या 19/14: खोराबाद में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के दोषी आजम को दस साल की सजा हुई।
अपराध संख्या 222/12: गुलरिहा इलाके के ईश्वर को दुष्कर्म का दोषी पाए जाने पर दस साल की सजा हुई।
अपराध संख्या 142/12: हरपुर बुदहट इलाके में दुष्कर्म के दोषी धर्मराज को सात साल की सजा हुई।
अपराध संख्या 133/14: गगहा के भूषण को दुष्कर्म का दोष सिद्ध होने पर दस साल की सजा व जुर्माना।
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nirbhaya
गोरखपुर में डीजीपी की मानीटरिंग सेल, व्यवस्था फेल
उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ने पर डीजीपी ने सभी जिलों में मानीटरिंग सेल बनाकर चार महीने में आरोपितों को सजा दिलाने की कोशिश की थी लेकिन गोरखपुर में यह व्यवस्था फेल है। कई ऐसे मामले हैं जिनमें सात महीने से अधिक का समय गुजर गया है लेकिन आज तक पीड़ित को न्याय नहीं मिल सका है। आज भी पीड़ित और उनके परिवार के लोग कचहरी के चक्कर काट रहे हैं और पुलिस जल्द सजा दिलाने के नाम पर समय से चार्जशीट (आरोप पत्र) ही दाखिल कर सकी है।
केस 1- 15 जून 2019 को सिकरीगंज इलाके की एक बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। घर पर आने वाले शख्स ने अपनी पहचान न हो सके इसलिए बच्ची की हत्या भी कर दी। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर चार्जशीट तो फाइल कर दी है लेकिन आज तक सजा नहीं हो सकी है।
केस 2 - 18 जून 2019 को सिकरीगंज में ही रिश्तेदारी के नाम पर घर में ठहरे एक शख्स ने बच्ची से दुष्कर्म किया। इस मामले में भी आरोपित को पकड़कर पुलिस ने जेल भेजा। समय से कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी लेकिन सबूत इतने पुख्ता नहीं हैं कि सजा हो सके। यह भी मामला लंबित है।
केस 3 - 19 जून 2019 को चिलुआताल इलाके में दस साल की बच्ची को अगवा कर दरोगा पुत्र ने कार में दुष्कर्म किया। फिर उसे मौत के घाट उतारने की भी कोशिश की मगर शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंच गए और उसकी जान बच गई। इस मामले में भी सजा नहीं हो सकी है।