निर्भया को इंसाफ दिलाने में गोरखपुर के अवनींद्र की भूमिका अहम रही है। बस में जिस समय निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी, उस वक्त गोरखपुर के अवनींद्र उसके साथ थे। अवनींद्र ने दरिंदों से लोहा भी लिया, लेकिन निर्भया को बचा नहीं सके। मामले में वे ही चश्मदीद गवाह भी बने। अवनींद्र ने न सिर्फ दोस्ती निभाई बल्कि दोषियों को फांसी की सजा दिलाने में अहम कड़ी साबित हुए।
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निर्भया के साथ मौके पर मौजूद दोस्त अवनींद्र व दोषी पवन।
- फोटो : अमर उजाला
निर्भया के गुनाहगारों के खिलाफ लड़ने वाले अवनींद्र घटना के बाद इतने टूट गए थे कि उन्हें संभालने में परिवार को चार साल लग गए। अब दोषियों को सजा होने के बाद अवनींद्र ने कहा, आज वास्तव में उनकी दोस्त को इंसाफ मिला है। निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले मुकेश, पवन, अक्षय और विनय को 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी। पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों का डेथ वारंट भी जारी कर दिया है। इसकी जानकारी होते ही अवनींद्र की आंखों में आंसू आ गए।
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निर्भया के साथ मौके पर मौजूद दोस्त अवनींद्र
- फोटो : file
वे विदेश में हैं, लेकिन दोषियों का डेथ वारंट जारी होने की सूचना मिलने के बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता पिता भानू प्रकाश पांडेय से बात की। जानकारी के मुताबिक 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया अपने दोस्त अवनींद्र के साथ नई दिल्ली में बस से जा रहीं थीं। इस दौरान चारों दोषियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। इस घटना ने अवनींद्र को अंदर से झकझोर दिया। वे सदमे में चला गए।
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Avanindra
- फोटो : अमर उजाला
चश्मदीद गवाह के तौर पर निर्भया के साथ सिर्फ वही मौजूद थे जिनकी गवाही से आरोपियों को सजा होती। काफी लंबे समय तक उन्होंने गुमनामी की जिंदगी व्यतीत की। अवनींद्र के पिता भानू प्रकाश पांडेय घटना का जिक्र होते ही भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि किसी के लिए कहना और सुनना आसान होता है, मगर उस रात जो घटना हुई और हम लोगों ने कौन से दिन देखे उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
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nirbhaya friend avanindra
- फोटो : अमर उजाला
अब विदेश में हैं अवनींद्र
करीब तीन साल पहले परिवार ने अवनींद्र की शादी कराई। अब एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम कर रहे अवनींद्र दो साल के बेटे और पत्नी के साथ विदेश में रहते हैं।
अवनींद्र हैं इकलौते चश्मदीद
भानू प्रकाश के मुताबिक निर्भया कांड के गवाह के साथ ही अवनींद्र ही इकलौते चश्मदीद रहे। इस घटना ने अवनींद्र को इस कदर तोड़ा कि आज भी वे मीडिया से दूरी बनाए रहते हैं। ज्यादातर बातें मेरे जरिये ही रखते हैं। इस पूरे केस के गवाह, चश्मदीद होने की वजह से अवनींद्र को कई बार डर भी लगा लेकिन वह कोर्ट में अपनी बात कहने में पीछे नहीं हटे। कोर्ट में गवाही देने की देन रही कि मंगलवार को कोर्ट ने सभी को फांसी की सजा सुनाई।