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आखिर क्यों धरने पर बैठे नेपाली नागरिक, कहा- परवाह नहीं मार दें गोली, जानें क्या है पूरा मामला

Wed, 01 Apr 2020 11:08 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
भारत से नेपाल जा रहे करीब तीन सौ नेपाली नागरिकों को सोमवार रात सोनौली में नेपाल पुलिस ने रोक दिया। जिस पर सभी हंगामा करने लगे और जबरन नेपाल जाने लगे, जिसपर नेपाल पुलिस ने लाठीचार्ज कर भगा दिया। घटना की सूचना मिलते ही दोनों देशों की पुलिस ने हालात पर काबू पाया।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
घटना से नाराज सभी नेपाली नागरिक नो मेंस लैंड पर ही नेपाल सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए और घर जाने की जिद कर रहे हैं। मौके पर रात में ही पहुंचे डीएम और एसपी ने लोगों को धरना समाप्त करने और नो मेंस लैंड को छोड़कर कर रैन बसेरा में रहने को कहा लेकिन लोग नहीं माने।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
मंगलवार को भारत नेपाल सीमा सोनौली बॉर्डर पर करीब तीन सौ नेपाली नागरिक धरने पर बैठे रहे। जिन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सभी अपने घर नेपाल जाने की बात अड़े हैं। नेपाली नागरिक राधिका थापा, संजू, सुग्रीम, रमेश, गुरुंग, माया ने बताया कि दिल्ली हरियाणा से सीमा पर किसी तरह पहुंच गए हैं।

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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
अब पच्चीस पचास किलोमीटर के लिए यहां नहीं रुक सकते। सरकार चाहे गोली मार दे। इसकी परवाह नहीं है। घर जाकर ही रहेंगे। बेलहिया इंस्पेक्टर ईश्वरी अधिकारी ने बताया कि सभी यात्रियों के नो मैंस लैंड पर ही जांच के साथ नाम पते नोट किए जा रहे हैं। घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। जैसा निर्देश मिलेगा, उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
एसडीएम जसधीर सिंह ने बताया कि नेपाल के उच्चाधिकारियों को पूरे घटना क्रम के बारे में जानकारी दी गई है। यहां सभी के लिए रहने एवं भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है।

 
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indo-nepal border - फोटो : अमर उजाला
एडीएम के समझाने पर माने नेपाली नागरिक
सोनौली बार्डर पर धरने पर बैठे नेपाली नागरिक मंगलवार की शाम 6 बजे एडीएम नौतनवां एवं सीओ के समझाने पर मान गए। धरना समाप्त कर रहने के लिए सहमत हो गए। उन्हें बस से नौतनवां इंटर कालेज नौतनवां परिसर में लाया गया।

एसडीएम जसधीर सिंह यादव ने बताया कि नो मेंस लैंड पर धरना देने वाले सभी नेपाली नागरिको को नौतनवां इंटर कालेज में रहने के लिए लाया गया है। लाकडाउन समाप्त होने तक वह इंटर कालेज में ही रहेंगे। नेपाली प्रशासन की ओर से उन्हें वापस लेने के लिए मना कर दिया गया। उनके रखने खाने के बेहतर व्यवस्था की गई है।
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