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नेपाल त्रासदी ग्राउंड रिपोर्ट: पलभर में उजड़ गया बरसों में बसा बाजार, पिता की कमाई से बना घर-दुकान सब बहा

Tue, 01 Sep 2026 03:50 PM IST
Rohit Singh पाल के विदुर में सिमचौर बाजार से राजन राय

सार

उजड़े बाजार को देखने आए गोकरण अमेदी ने बताया कि हम सिमचौर गांव में रहते थे। यहां हम मार्केट करने आते थे। यहां कई गांव के लोग आते थे। मुर्गी बाड़ा था, मछली पालन होता था। राशन की दुकानें थीं। यहां एक पुल था, जहां से पांच गांवों के लोग जाते थे। नदी किनारे बाजार होने के चलते पिकनिक स्पॉट की तरह था। 26 मेगावाट का सोलर पार्क था। पर, अब तो कुछ नहीं बचा। 
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक त्रासदी ने त्रिशूली नदी के किनारे बसे विदुर नगर पालिका के सिमचौर बाजार की पूरी तस्वीर बदल दी है। जिस जगह कुछ दिन पहले तक घर, दुकानें और लोगों की चहल-पहल दिखाई देती थी, वहां अब तबाही के निशान नजर आ रहे हैं।
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करीब 45 घरों की पूरी बस्ती वीरान पड़ी है, कुछ घरों का तो नामोनिशान तक नहीं बचा है। जबकि, कुछ की निशानियां मलबे के रूप में मौजूद हैं। कुछ मकान खंडहर की तरह नजर आ रहे हैं। सुखद बस इतना है कि बच्चे स्कूल पढ़ने गए थे इसलिए सभी सुरक्षित हैं।
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करीब 50 साल पहले यह बाजार बसा था। लोगों ने वर्षों की मेहनत से यहां अपने घर और कारोबार खड़े किए थे। किसी ने तिनका-तिनका जोड़कर घर बनाया था तो किसी ने छोटी सी दुकान से परिवार की रोजी-रोटी का इंतजाम किया था। नदी के रौद्र रूप के आगे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किराना की तीन दुकानें और होटल भी बह गया। सोमवार को सुबह करीब 11 बजे थे, अमर उजाला की टीम बाजार तक पहाड़ियों के बीच एक दुर्गम रास्ते से पहुंची। नदी के रौद्र रूप से भयावहता साफ दिख रही था। मलबे के बीच एक बस पड़ी थी।
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बच्चों की कॉपी-किताबें, सुहागिनों के जोड़े और दुकानों से बहकर आए कुछ सामान बिखरे पड़े थे। कुछ लोग सामान तलाश रहे थे। जिनका घर ही नहीं बचा है वे सिर्फ टकटकी लगाकर बेबस निगाहों से पुरानी यादों को ताजा कर रहा था।
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता की कमाई से बनाया मकान-दुकान, सब बह गया
कारोबारी श्याम बहादुर तमांग कहते हैं, पिता की कमाई से बस्ती में घर और दुकान बनाया। मेरा होटल था और सामान की थोक सप्लाई करता था। बस परिवार को निकाल पाया, गहने, नकद, सामान सब कुछ आंखों के सामने बह गया। सोचा था कि घर पर एक मंजिल और बनाऊंगा, क्या पता था कि जो था वह भी नहीं बचेगा।
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाजार में खरीदारी करने आते थे
उजड़े बाजार को देखने आए गोकरण अमेदी ने बताया कि हम सिमचौर गांव में रहते थे। यहां हम मार्केट करने आते थे। यहां कई गांव के लोग आते थे। मुर्गी बाड़ा था, मछली पालन होता था। राशन की दुकानें थीं। यहां एक पुल था, जहां से पांच गांवों के लोग जाते थे। नदी किनारे बाजार होने के चलते पिकनिक स्पॉट की तरह था। 26 मेगावाट का सोलर पार्क था। पर, अब तो कुछ नहीं बचा। नेपाल के भैरवहां से सामान पहुंचाने आए ड्राइवर अशोक ने बताया कि यहां हमेशा सामान लेकर आता था। होटल और दुकान तो नदी में बह गए।

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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब बाजार में कोई फिर नहीं बसेगा
नगर पालिका के सदस्य शिव कुमार लामा खुद बाढ़ पीड़ित है। उनका मकान और दुकान नदी में बह गया। जनप्रतिनिधि होने के चलते सबकी देखभाल कर रहे हैं। वे बताते हैं कि अब यहां रहने लायक नहीं है। करीब दो खरब का नुकसान हुआ है। खाने के लिए एक संस्था ने भोजन की व्यवस्था की है, रहने का कोई इंतजाम नहीं है। मेयर और मंत्री से बात करुंगा कि हमें कहीं और सुरक्षित स्थान आवंटित कराएं ताकि फिर घरौंदा खड़ा कर सकें।

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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुल बहा, पांच गांवों का रास्ता बंद
सिमचौर बाजार की तबाही के साथ ही इलाके की दूसरी बड़ी मुसीबत सामने आ गई है। नदी पर बना पुल भी तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। पुल टूटने के बाद नदी के ऊपर पहाड़ी पर बसे करीब पांच गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। इन गांवों तक पहुंचने वाला सामान्य रास्ता अब लोगों के लिए बंद हो चुका है। सड़क और पुल के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। जरूरी सामान पहुंचाना हो या किसी बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए नीचे लाना हो, हर काम चुनौती बन गया है। हेलिकाॅप्टर से सेना के जवान खाद्यान्न सामग्री पहुंचा रहे हैं।
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बिजली का संकट भी गहराया
त्रासदी ने बिजली व्यवस्था को भी प्रभावित कर दिया। इलाके में बिजली आपूर्ति के लिए लगाया गया सोलर प्लांट भी नदी के तेज बहाव में समा गया। प्लांट के बह जाने से पहाड़ी पर बसे इन पांच गांवों में बिजली पहुंचने का रास्ता भी बंद हो गया है। अंधेरा बढ़ने के साथ ग्रामीणों की मुश्किलें और गहरी हो गई हैं। बिजली के अभाव में मोबाइल चार्ज करने, जरूरी संचार बनाए रखने और रात के समय रोशनी की व्यवस्था करना भी कठिन हो रहा है। ऐसे हालात में लोगों की निर्भरता राहत और बचाव दलों पर बढ़ गई है।
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