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यूपी: यहां 'युवा वैज्ञानिक' ने इन खास लोगों के लिए बनाया अनोखा ड्रोन, जानिए क्या है इसकी खासियत

Mon, 01 Mar 2021 05:43 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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सैनिकों व किसानों की मदद के लिए ड्रोन बनाने वाले राहुल सिंह (मध्य में)। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के 'युवा वैज्ञानिक' राहुल सिंह ने ऐसा ड्रोन तैयार किया है जो सरहद पर सैनिकों की मदद करेगा, वहीं किसानों के लिए भी मददगार साबित होगा। सेना ड्रोन का इस्तेमाल नदी की गहराई मापने में कर सकती है, वहीं किसान खाद व कीटनाशक का छिड़काव भी सरलता से कर सकेंगे।
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राहुल सिंह (मध्य में)। - फोटो : अमर उजाला।
राहुल की खोज को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमटीयू) के डिजाइन एंड इक्यूबेशन सेंटर से मंजूरी मिल चुकी है। अमर उजाला संवाददाता से राहुल ने ड्रोन की खासियतें बताईं।
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राहुल सिंह।(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
राहुल ने कहा कि वे मूलत: महाराजगंज के बीजापार, आसमन छपरा के रहने वाले हैं। उनके पिता संजय सिंह किसान और मां रासमुनी देवी गृहिणी हैं। खेती में पिता को हो रही परेशानियों के मद्देनजर राहुल ने कई उपयोगी औजार बनाए।

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राहुल सिंह (मध्य में)। - फोटो : अमर उजाला।
ड्रोन फोटो सेंसर की मदद से बाढ़ आने पर फंसे लोगों की लोकेशन पता कर उनकी फोटो सेना के जवानों को भेजने की उच्चीकृत क्षमता से भी लैस है। 'युवा वैज्ञानिक' का दावा है कि यह अब तक का सबसे सस्ता ड्रोन है। इसलिए इसका नाम 'लो कॉस्ट ऑफ ड्रोन' रखा है। इसे तैयार करने में 80 हजार रुपये का खर्च आया है।
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राहुल सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
आवाज से भी होगा नियंत्रित
एबीसी पब्लिक स्कूल में बारहवीं के छात्र राहुल ने बताया कि उन्होंने ड्रोन थल सैनिकों और किसानों को ध्यान में रखकर बनाया है। ड्रोन की खासियत यह है कि रिमोट के अलावा यह वॉइस कैच (आवाज) पर नियंत्रित किया जा सकता है। किसान हिंदी, अंग्रेजी और भोजपुरी भाषा में बोलकर ड्रोन को कंट्रोल कर सकते हैं।
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राहुल सिंह।(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि राहुल बीते वर्षों से लगातार इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल कर दबदबा बनाए हुए हैं। वर्ष 2018 में रोटी मेकर, वर्ष 2019 में बैट्री से चलने वाली इको फ्रेंडली साइकिल और 2020 के वैश्विक महामारी के चलते ऑनलाइन हुए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बैट्री से चलने वाला इको फ्रेंडली ट्रैक्टर बनाकर पहला स्थान बरकरार रखा।
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