ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं। बताया कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह बताया गया है। मन को शिव के प्रति समर्पण के उद्देश्य से भी नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है।
नाग देवता की उपासना का पर्व नाग पंचमी इस वर्ष दो अगस्त को मनाया जाएगा। इस अवसर पर महानगर के सभी छोटे-बड़े शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी, जहां भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव और नाग देवता को प्रसन्न करेंगे। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र दिन में तीन बजकर 47 मिनट तक पश्चात हस्त नक्षत्र है। इसी प्रकार शिव योग शाम बजकर 53 मिनट तक विद्यमान है।
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नाग पंचमी।
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वहीं, दाता नामक शुभ औदायिक योग भी है। चंद्रमा की स्थिति कन्या राशि पर रहेगी, जिसका स्वामी बुध नामक सौम्य ग्रह है। दोनों योग शुभ होने से इस दिन भगवान शिव और नागदेवता के पूजन-अर्चन से राहु केतु सहित काल सर्प के दोष से मुक्ति मिलेगी।
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nag panchami 2022
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नागदेवता के पूजन से मिलता है भगवान शिव का आशीर्वाद
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, हिंदू धर्म में नाग को भगवान शिव के गले का हार और भगवान विष्णु की शैय्या कहा गया है। ऐसे में माना जाता है कि नाग की पूजा करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
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Nag Panchami 2022
- फोटो : अमर उजाला।
ज्योतिष में नाग पंचमी का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं। बताया कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह बताया गया है। मन को शिव के प्रति समर्पण के उद्देश्य से भी नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है। नाग को शिव का सेवक भी कहा जाता है। नाग भगवान शिव के गले में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि नाग पृथ्वी को संतुलित करते हैं। ऐसे में उनकी उपासना का महत्व और भी बढ़ जाता है।
नाग पंचमी की पूजन-विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, इस व्रत के एक दिन पूर्व यानि चतुर्थी को एक समय भोजन कर पंचमी तिथि को उपवास रखें। गरुड़ पुराण के अनुसार, व्रती अपने घर के दोनों ओर नागों को चित्रित करके उनकी विधि पूर्वक पूजा करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं, इसलिए भक्तिभाव के साथ गंध, पुष्प, धूप, कच्चा दूध, खीर, भीगा हुआ बाजरा और घी से नाग देवता का पूजन करें। उन्हें लावा और दूध अर्पण करें। इस दिन सपेरों और ब्राह्मणों को भी लड्डू और दक्षिणा दान करें।