जीवित्पुत्रिका व्रत (जिउतिया) का पर्व बृहस्पतिवार को परंपरागत रूप से श्रद्धा के साथ मनाया गया। माताओं ने संतान के दीर्घायु होने की कामना से निर्जला व्रत रखा। कोरोना से निजात के लिए भी इस दौरान प्रार्थना की गई। दोपहर के बाद माताओं ने संतान की समृद्धि और आरोग्य के मनोरथ के साथ बरियार (पौधे) की पूजा की। इसके बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा भी सुनीं। माताएं शुक्रवार को अपनी संतानों के गले में जिउतिया बांधने के बाद व्रत का पारण करेंगी।