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लॉकडाउन 3.0: घर लौटने से नहीं रोके जाएंगे मजदूर, इस वजह से डीएम ने दिए ये आदेश

Sun, 10 May 2020 11:01 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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gorakhpur Lockdown - फोटो : अमर उजाला।
औरंगाबाद में हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। अब सड़कों से घर जाने वाले मजदूरों को रोका-टोका नहीं जाएगा ताकि ऐसी परिस्थिति ही न बने कि उन्हें जान जोखिम में डालकर रेल की पटरी आदि खतरनाक रास्तों का विकल्प चुनना पड़े।
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gorakhpur Lockdown - फोटो : अमर उजाला।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने इस संबंध में शनिवार की सुबह ही सड़क, चौराहों और बार्डर के चेक पोस्टों पर ड्यूटी कर रहे प्रशासन एवं पुलिस के अफसरों-कर्मचारियों के निर्देश दिया कि जो भी मजदूर अपनी मर्जी से घर जाना चाहते हैं उन्हें जाने दिया जाए। किसी को बेवजह परेशान न किया जाए।
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gorakhpur Lockdown - फोटो : अमर उजाला।
उन्होंने कहा कि वहीं जो मजदूर जिले में रहना चाहते हैं, वह रहें। प्रशासन सभी की पूरी देखभाल करेगा। किसी को खाने-पीने की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। जिला मुख्यालय पर नेपाल क्लब और सभी तहसीलों में संचालित कम्यूनिटी किचन से हर मजदूर को दोनों टाइम खाना व नाश्ता दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें राशन भी दिया जाएगा। यही नहीं मजदूरों को अपने परिवार के पालन-पोषण को लेकर भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। प्रशासन दूसरे प्रांतों-जिलों से आए मजदूरों को भी रोजगार मुहैया कराएगा।

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gorakhpur Lockdown - फोटो : अमर उजाला।
दरअसल बड़ी संख्या में हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र आदि प्रांतों और प्रदेश के भीतर के जिलों से मजदूर घर लौट रहे हैं। हजारों की संख्या में मजदूरों को शासन ट्रेनों-बसों से पहुंचा रहा है। इसके बाद भी बड़ी संख्या में मजदूर साइकिल, रिक्शा, ऑटो या फिर पैदल ही अपने घरों के लिए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने को निकल पड़ रहे हैं।
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gorakhpur Lockdown - फोटो : अमर उजाला।
संक्रमण का खतरा देख कई जिलों का प्रशासन उन्हें वहीं पर 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दे रहा है। ऐसे में क्वारंटीन से बचने के लिए वे ट्रेन की पटरियों, पुलों के नीचे, पंगडंडियों आदि से चोरी छिपे गुजर रहे जिससे उनकी जान पर खतरा बन आया है। शुक्रवार के औरंगाबाद में ऐसी ही एक घटना में थककर पटरी पर ही सो जाने से कई मजदूरों की जान चली गई।
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gorakhpur Lockdown - फोटो : अमर उजाला।
63 बसों से 1574 मजदूर पहुंचे, 211 गोरखपुर के
शनिवार को 63 बसों से 1574 लोग गोरखपुर स्थित कसरवल बार्डर पर पहुंचे। इनमें गोरखपुर के 211 मजदूर थे। इनकी थर्मल स्कैनिंग और नाम-पता व मोबाइल नंबर आदि जरूरी जानकारियां दर्ज करने के बाद 21 दिन होम क्वांटरीन के लिए भेज दिया गया।

सहजनवां के तहसीलदार लालजी विश्वकर्मा ने बताया कि महराजगंज, कुशीनगर और बिहार बार्डर के 1367 मजदूरों को ले जा रही बसों को फोर लेन से रवाना कर दिया गया। ये सभी मजदूर, राजस्थान, अमृतसर, नोएडा, लुधियाना से आए थे। उधर, दूसरे जिलों के तमाम मजदूर, प्राइवेट बसों और ट्रकों पर सवार होकर भी पहुंचे मगर उनका रिकार्ड नहीं रखा जा रहा। सभी वाहनों को फोर लेन से ही संबंधित जिलों के लिए रवाना कर दिया जा रहा है।
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