साल का पहला चंद्र ग्रहण शुक्रवार को लग रहा है। पौष पूर्णिमा के दिन लग रहा यह एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। इसलिए इस ग्रहण को सरलता से नहीं देखा जा सकेगा। इस ग्रहण को आप आंशिक और पूर्ण ग्रहण की तरह नहीं मान सकते। इसमें चंद्रमा का कोई भी हिस्सा छिपेगा नहीं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तरह के ग्रहण को मांद्यचंद्र ग्रहण कहते हैं। इस ग्रहण में चंद्रमा का कोई हिस्सा नहीं छिपेगा, बल्कि चांद मटमैला सा दिखेगा। इसलिए ज्योतिष इस तरह के ग्रहण को ग्रहण नहीं मानते।
इसकी धार्मिक मान्यता नहीं है। इसलिए इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे। किसी ग्रहण के नौ घंटे पहले लगने वाला सूतक भी इस ग्रहण में नहीं लगेगा। इसलिए किसी को इस ग्रहण से घबराने की आवश्यकता नहीं है।
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चंद्र ग्रहण
- फोटो : पेक्सेल्स
चार घंटे पांच मिनट तक रहेगा ग्रहण
गोरखपुर समेत पूरे देश में इस ग्रहण का कोई असर नहीं होगा। ये ग्रहण 10 जनवरी की रात में शुरू होगा। इसमें चंद्रमा के आगे धूल की एक परत-सी छा जाएगी। यह चंद्र ग्रहण 10 जनवरी को रात 10:37 बजे शुरू होगा। इसका मध्य 12:40 बजे होगा, इसका मोक्ष रात 2.42 बजे पर होगा।
बातचीत
ग्रहण किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता है, पर 10 जनवरी को लगने वाले चंद्र ग्रहण का यहां कोई असर नहीं होगा। पंडित नरेंद्र उपाध्याय, ज्योतिर्विद
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lunar eclipse
- फोटो : file
10 जनवरी को को लगने वाले चंद्र ग्रहण का गोरखपुर में कोई असर नहीं होगा। ग्रहण जहां दिखाई नहीं देता वहां सूतक का कोई महत्व नहीं होता। मनीष मोहन, ज्योतिर्विद
पूरे भारत में इस चंद्र ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं है। इस ग्रहण का अमेरिका, अर्जेंटीना आदि देशों में प्रभाव रहेगा। यहां सूतक नहीं लगने के कारण सभी कार्य होते रहेंगे। पंडित शरद चंद्र मिश्र, प्रवक्ता अखिल भारतीय विद्वत महासभा
यहां उपच्छाया चंद्र ग्रहण का कोई असर नहीं होगा। सूतक काल नहीं होने से सभी मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे। किसी भी तरह नियम इस ग्रहण में लागू नहीं होंगे घनश्याम पांडेय, ज्योतिषाचार्य
नक्षत्रशाला दिखाएगा उपच्छाया चंद्र ग्रहण
शुक्रवार को लगने वाला साल का पहला उपच्छाया चंद्र ग्रहण वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में विभिन्न दूरबीनों के माध्यम से निशुल्क दिखाया जाएगा। यह जानकारी देते हुए नक्षत्रशाला के खगोलविद अमरपाल सिंह ने बताया कि ग्रहण 10:37 से शुरू होकर 02:42 तक रहेगा। उन्होंने बताया कि चंद्रग्रहण को ओल्ड मून, आइस मून, बोल्ड मून और स्नो मून के नाम से जाना जाएगा। ग्रहण को एशिया, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, यूरोप एवं नार्थ अमेरिका के कुछ भागों में देखा जाएगा।