आज मजदूर दिवस है, लेकिन हर बार से अलग। मजदूरों के हितों को लेकर इस बार न तो गोष्ठियां होंगी और न ही रैलियां निकाली जाएंगी। ज्यादातर फैक्ट्रियों में लॉकडाउन की वजह से ताले पड़े हैं। कोरोना की सबसे ज्यादा मार इन्हीं मजदूरों पर ही पड़ी है। खासकर दिहाड़ी और ठेके पर काम करने वाले मजदूरों पर, इनके घर के चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं।
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भगवानपुर निवासी संजय।
- फोटो : अमर उजाला।
सरकार की ओर से राशन सामग्री और एक हजार रुपये मिले हैं, लेकिन दूसरे जिलों से आए मजदूरों का इसका भी लाभ नहीं मिला, क्योंकि ज्यादातर अनियमित श्रमिक हैं और इनका पंजीयन भी श्रम विभाग में नहीं है। कुछ ऐसे ही मजदूरों से उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की गई तो उनका दर्द छलक उठा। बोले, गली-नुक्कड़ पर किराना की दुकानों से उधारी पर सामान भी मिलना बंद हो गया है। खाने का संकट है। कर्ज का बोझ चढ़ता जा रहा है। एनजीओ के लोगों के सहारे भोजन का इंतजाम हो रहा है।
गांव से रुपये मंगाए तो खर्च चला
भगवानपुर निवासी संजय बताते हैं कि बहुत खराब स्थिति है। 19 मार्च के बाद से ही घर पर बैठे हैं। मुझे तो सरकारी मदद भी नहीं मिली है। गोंडा का रहने वाला हूं, यहां पार्षद के पास नाम, पता नोट करवाया, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं मिला। गांव से रुपये मंगाए थे तो घर का खर्च चल रहा है।
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बरगदवां निवासी अजय मिश्रा।
- फोटो : अमर उजाला।
हमें तो कोई मदद नहीं मिली
बरगदवां निवासी अजय मिश्रा बताते हैं कि सरिया फैक्ट्री में काम करते हैं। नियमित नहीं होने के चलते हमें कोई मदद नहीं मिली। डीएम से भी मुलाकात की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जो रुपये थे उसी से खर्च चल रहा है। अगर लॉकडाउन और बढ़ा तो घर का चूल्हा जलना मुश्किल हो जाएगा।
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बरगदवां निवासी दीपक यादव।
- फोटो : अमर उजाला।
जो बचाकर रखे थे, वह भी खर्च हो गया
बरगदवां निवासी दीपक यादव बताते हैं कि किराए पर परिवार के साथ रहता हूं। फैक्ट्री बंद है तो कमाई भी नहीं हो रही है। थोड़ा बहुत बचाकर जो रखा था उसी से काम चल रहा है। सरकार से मुझे कोई मदद नहीं मिली है।
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विकासनगर निवासी अरुण चौबे।
- फोटो : अमर उजाला।
कर्ज लेकर राशन लाया हूं
विकासनगर निवासी अरुण चौबे बताते हैं कि हम लोग किराए पर मकान लेकर रहते हैं, इसलिए राशन कार्ड भी नहीं है। सुना है सरकार ने श्रमिकों को राशन और नकद देकर मदद की है ,लेकिन हमें तो कुछ भी नहीं मिला। कर्ज लेकर घर का राशन लाया हूं। ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी।
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राजेंद्र तिवारी।
- फोटो : अमर उजाला।
एक रुपये की कमाई नहीं
एफसीआई राजेंद्र तिवारी बताते हैं कि एक महीने से ज्यादा हो गया है, एक रुपये कमाई नहीं हुई। जो पहले का बचाकर रखा था उसी से किसी तरह घर का खर्च चला रहा हूं। गांव सिद्धार्थनगर जिले में है, लेकिन रास्ता बंद है तो परिवार को लेकर जा भी नहीं सकते हैं।
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फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
मजदूर दिवस पर नहीं होंगे कार्यक्रम
लॉकडाउन के बीच आज मजदूर दिवस मनाया जा रहा है। सहायक श्रमायुक्त वीके श्रीवास्तव ने बताया कि लॉकडाउन के कारण ज्यादातर कारखाने बंद हैं। ऐसे में वहां इस बार वहां मजदूर दिवस पर कोई भी कार्यक्रम नहीं हो सकेगा। श्रम विभाग की ओर से मजदूर दिवस पर वृहद कार्यक्रम आयोजित होते थे। इस बार सभी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम पर रोक है।
लॉकडाउन में मिल रही श्रमिकों को मदद
श्रमिकों एवं मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों के खाते में एक हजार रुपये मासिक भेजने की योजना तैयार की गई। इसके बाद श्रमिकों के खाते में रुपये भेजने का सिलसिला शुरू हो गया जो अब भी जारी है। सहायक श्रमायुक्त वीके सिंह ने बताया कि मंडल मे अब तक 89938 मजदूरों के खाते में 89938000 रुपये भेजे जा चुके हैं। वहीं जिले में 34150 श्रमिकों के खाते में 34150000 रुपये की धनरशि भेज जा चुकी है।