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Sawan 2020: सावन में व्रत करने से मिलता है '52 सोमवार व्रत' के बराबर फल, इन राशियों पर भी पड़ता है असर

Tue, 07 Jul 2020 09:15 AM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
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इनसेट में पंडित शरद चंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला।
सावन का महीना भगवान शिव का होता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति सावन माह में सोमवार व्रत रखते हैं, उन्हें भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार सावन के सभी सोमवार व्रत करने से साल के सभी 52 सोमवार व्रत करने का फल श्रद्धालु को मिलता है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें सावन के सोमवार व्रत का महत्व और उसके फल...

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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
प्रथम सोमवार: इस दिन उत्तराषाढ़ नक्षत्र और वैधता योग है। चंद्रमा की स्थिति मकर राशि गत है। यह आर्थिक दृष्टि से पूर्ण सफलता और अनुकूलता प्रदान करने वाला रहेगा। श्रावण का प्रथम सोमवार व्यापार वृद्धि और नौकरी में प्रमोशन एवं भौतिक सुख-सपंन्नता की दृष्टि से उत्तम माना जाता है। यह सोमवार अमूल्य धरोहर है ।

 
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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
द्वितीय सोमवार: इस दिन रेवती और अश्विनी नक्षत्र है। चंद्रमा की स्थिति मीन और मेष राशिगत है। सुकर्मा नामक योग है। पारिवारिक कलह को दूर करने के लिए इस सोमवार के व्रत का अत्यंत महत्व है। इस दिन के व्रत से घर में स्थित गृहदोष का भी निवारण हो जाता है और आश्चर्य जनक भाग्योदय भी होता है ।

 

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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर)
तृतीय सोमवार: इस दिन अमावस्या तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र और हर्षण योग है। चंद्रमा को स्थिति सौम्य राशि मिथुन राशिगत है। सौम्य योग होने के कारण इस दिन जो भी अर्चन-पूजन होगा, उसका प्रतिफल उत्तम ही होगा। इस दिन के व्रत से अखंड सौभाग्य का योग बनेगा। इस दिन का व्रत संतान की सुरक्षा, उनकी सफलता और पुत्रोन्नता के लिए श्रेयष्कर है।
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भगवान शिव की आराधना करते भक्त - फोटो : अमर उजाला
चतुर्थ सोमवार: इस दिन सप्तमी तिथि, चित्रा नक्षत्र और साध्य योग है। इस दिन भी चंद्रमा की स्थिति सौम्य राशि तुला पर है। इस दिन के व्रत और शिवार्चन से भविष्य में आने वाली अड़चनें दूर होंगी। पूर्ण रोग विमुक्ति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए इस दिन का व्रत उत्तम है।

 
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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : AmarUjala
पंचम सोमवार: इस दिन उत्तराषाढ़ और श्रवण नक्षत्र का सुंदर सुयोग है। पूर्णिमा तिथि और श्रावणी उपाकर्म तथा रक्षाबंधन का परम पुनीत पर्व होने से इस दिन का व्रतार्चन उत्तमोत्म फल प्रदान करने वाला रहेगा। आरोग्यता की प्राप्ति और प्रत्येक प्रकार की मनोकामना की संसिद्धि के लिए इस दिन का व्रतार्चन उत्तम है।
 
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