ओ वतना वे, मेरे वतना वे। तेरा मेरा प्यार निराला था। कुरबान हुआ तेरी असमत पे, मैं कितना नसीबा वाला था। फिल्म केसरी का ये गाना महज 23 साल की उम्र में कारगिल युद्ध के दौरान अपने प्राण न्योछावर करने वाले राईफल मैन शिव सिंह छेत्री पर फबता है। बेटे को खोने का दुख तो परिवार को ताउम्र रहेगा, मगर बेटा ऐसा काम कर गया कि सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
बिछिया में अपने दो और बेटों के साथ रहने वाले पिता गोपाल छेत्री की आंखें आज भी शहीद बेटे शिव सिंह छेत्री का जिक्र होते ही नम हो जाती हैं। 11 मई को उनकी पत्नी और शिव सिंह छेत्री की मां गीता देवी ने भी शरीर त्याग दिया। वे कहते हैं बेटे के जाने का गम तो है लेकिन देश के लिए उसने जो कर दिखाया उस पर गर्व है।